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नरेन्द्र मोदी के दावों को चुनौती मान रहे हैं अन्य राज्य Print
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Tuesday, 12 November 2013 10:27

प्रदीप श्रीवास्तव

नई दिल्ली। गुजरात में विकास को लेकर नरेंद्र मोदी के दावों को दूसरे राज्य चुनौती की तरह लेने लगे हैं। मध्य प्रदेश के विकास के बारे में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कुछ समय पहले शिवराज सिंह चौहान की एक रैली में गुजरात से जो तुलना की थी, वह इसी राजनीतिक मनोविज्ञान से संबंधित है। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो वकायदा एक पुस्तिका छाप कर यह साबित करने की कोशिश की है कि मोदी के दावे भ्रामक हैं। विकास और लोक कल्याण के मद में हरियाणा की उपलब्धि गुजरात से कहीं अधिक है। बीते रविवार को गोहाना में अपनी ‘शक्ति प्रदर्शन रैली’ में हुड्डा ने ‘हरियाणा और गुजरात का तुलनात्मक विवरण’ नाम की इस पुस्तिका का सार्वजनिक वितरण भी कराया।

 

अगले साल हरियाणा में आम चुनाव और विधानसभा चुनाव दोनों होने हैं। विधानसभा चुनाव अक्तूबर में हैं। जबकि आम चुनाव इसके पहले। कहा जा रहा था कि हुड्डा विधानसभा का चुनाव आम चुनाव के साथ करा सकते हैं। लेकिन हुड्डा ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है। इसकी वजह भी है। साल 2009 में हुड्डा ने 6-7 महीने पहले चुनाव करा लिए थे। लेकिन सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं आई। जोड़ तोड़ कर किसी तरह हुड्डा ने सरकार बनाई। इसके अलावा प्रदेश में पार्टी के भीतर भी हुड्डा को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा, सांसद वीरेंद्र सिंह और गुड़गांव के सांसद राव इंद्रजीत सिंह हुड्डा के खिलाफ लगातार सार्वजनिक तौर पर बयान भी दे चुके हैं। पांच महीने पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हुड्डा और शैलजा के साथ एक बैठक में इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की थी।

राव इंद्रजीत सिंह का मामला अलग है। वह तो केंद्रीय नेतृत्व को भी परोक्ष तौर चुनौती दे चुके हैं। कल गोहना की रैली में भी ये तीनों नेता और उनके समर्थक नहीं शामिल हुए थे। इसके अलावा यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस अगर अगले चुनाव में प्रदेश में सरकार बनाने में कामयाब होती है तो हुड्डा की इस बार की दावेदारी में आम चुनाव के नतीजों का असर पड़ेगा। पिछले आम चुनाव में कांग्रेस को हरियाणा में भारी सफलता मिली थी। आम चुनाव को ही ध्यान में रखकर हुड्डा नरेंद्र मोदी के दावों को खारिज करने के लिए गुजरात के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

नरेंद्र मोदी जो लगातार दावे कर रहे हैं, उसे अगर हुड्डा सरकार की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के चश्मे से देखें तो यही लगता है की गुजरात के विकास के दावे की कहानी में बड़बोलापन अधिक और असलियत कम है। हुड्डा सरकार की ओर से जारी पुस्तिका को दोनों प्रदेशों की आर्थिक स्थिति से लेकर किसान, अनुसूचित जाति और पिछड़ों के कल्याण, शिक्षा, स्थानीय निकाय के विकास, खेलकूद, सैनिकों को दी जाने वाली सहायता जैसे कई क्षेत्रों का तुलनात्मक विवरण दिया गया है। मसलन आर्थिक क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय के लिहाज से 122660 रुपए के सात हरियाणा का देश में तीसरा स्थान है। वहीं इस मामले में गुजरात 89668 रुपए के साथ पांचवे स्थान पर है। वर्ष 2012-13 में


हरियाणा का वित्तीय घाटा 76 सौ करोड़ रुपए था जबकि गुजरात का साढ़े 58 हजार करोड़। शहरी क्षेत्र में उद्योगों में रोजगार की कर 319 प्रति हजार है। गुजरात में यह 306 प्रति हजार है।

इसी तरह कृषि क्षेत्र में किसानों के हितों के लिए उठाए गए कदमों का भी तुलनात्मक विवरण दिया गया है। हुड्डा सरकार के मुताबिक गुजरात में मनरेगा के तहत मजदूरी जहां 147 रुपए प्रतिदिन दी जा रही है, वहीं हरियाणा में यह 214 रुपए प्रतिदिन है। गन्ने का भाव हरियाणा में 301 रुपए प्रति क्विंटल है तो गुजरात में केवल 210 रुपए प्रति क्विंटल है।

गुजरात का क्षेत्रफल और उसकी आबादी हरियाणा से लगभग तीन गुनी है। जनसंख्या घनत्व भी कम है। लेकिन खाद्यान्न उत्पादकता गुजरात की अपेक्षा हरियाणा का दोगुने के करीब है। गुजरात में यह 19.61 क्विंटल प्रति हेक्टयर है, जबकि हरियाणा में यह 36.99 क्विंटल प्रति हेक्टयर है। यहां तक कि महंगाई और पेट्रोलियम कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर बरसते मोदी के गुजरात में डीजल का भाव 58.33 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल का भाव 76.10 प्रति लीटर है। वहीं हरियाणा में डीजल का भाव 50.86 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल का भाव 72.62 रुपए प्रति लीटर है। जाहिर है यह अंतर राज्यों के पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले सेल्स टैक्स और दूसरे राज्य के करों की वजह से है।

अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के कल्याण क्षेत्र में हरियाणा लड़कियों के विवाह में 31 हजार और 11 हजार रुपए शगुन के रूप में देता है। मकान निर्माण के लिए 50 हजार, मकान की मरम्मत के लिए 10 हजार की अनुदान राशि दी जाती है। पंचायतों को इन दोनों वर्गों के परिवारों के कल्याण के लिए 50 हजार प्रोत्साहन राशि हरियाणा सरकार की तरफ से मिलती है। गुजरात में यह शगुन राशि 10 हजार, मकान निर्माण के लिए अनुदान राशि 45 हजार है। मकान की मरम्मत या पंचायत को प्रोत्साहन के लिए वहां कोई पैसा नहीं मिलता।

पुस्तिका में इसी तरह कई अन्य मदों में गुजरात से तुलना की गई है। सैनिकों को पुरस्कार राशि के रूप में सबसे नीचे के पुरस्कार सेना मेडल पर 7.5 लाख रुपए से लेकर शौर्य चक्र, वीर चक्र, कीर्ति चक्र, महावीर चक्र और परमवीर चक्र इन सब पर हरियाणा सरकार लाखों रुपए का पुरस्कार देती है। परमवीर चक्र पर 31 लाख रुपए सैनिक या अफसरों को मिलता है। जबकि गुजरात सरकार में यह पुरस्कार तीन हजार रुपए से शुरू होता है। परमवीर चक्र पाने वालों को गुजरात सरकार केवल साढ़े 22 हजार रुपए देती है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे और कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा के मुताबिक मोदी जोर-शोर से सैनिकों और देश पर कुर्बानी की बात करते हैं। लेकिन सैनिकों को सम्मान नहीं देते। वह यह भी पूछते हैं कि खेलकूद के क्षेत्र में हरियाणा के खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों से लेकर ओलंपिक तक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। गुजरात इस क्षेत्र में कहां है?

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