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क्लीन चिट मिलने तक श्रीनिवासन बोर्ड का अध्यक्ष पद नहीं संभाल सकते: कोर्ट Print
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Tuesday, 02 September 2014 10:43


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि एन श्रीनिवासन को आइपीएल सट्टेबाजी और स्पाट फिक्सिंग कांड की जांच कर रही न्यायमूर्ति मुद्गल समिति की क्लीन चिट दिए जाने तक उन्हें भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष का पद संभालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह समिति श्रीनिवासन और 12 खिलाड़ियों की भूमिका की जांच कर रही है। 


न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति एफएम इब्राहिम कलीफुल्ला की खंडपीठ ने जांच की रफ्तार पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उसे दो महीने के भीतर अपना काम पूरा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने श्रीनिवासन या जांच के दायरे में आए किसी अन्य पदाधिकारी के बारे में अंतरिम रिपोर्ट भी दाखिल करने की अनुमति जांच समिति को प्रदान कर दी है। 

कोर्ट ने श्रीनिवासन का यह अनुरोध ठुकरा दिया कि उन्हें बोर्ड की वार्षिक आम सभा की बैठक में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने दिया जाए। उनका कहना था कि बोर्ड के वार्षिक खातों को मंजूरी देने के लिए उनके हस्ताक्षर जरू री हैं।

न्यायाधीशों ने कहा, ‘लेखा पुस्तकों पर हस्ताक्षर करना है। यह बहाली का आधार नहीं हो सकता हैं।’ इस मामले में सुनवाई शुरू  होते ही श्रीनिवासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट से यह बताने का अनुरोध किया कि क्या न्यायमूर्ति मुद्गल की अंतरिम रिपोर्ट में उनके खिलाफ कुछ है। उनका कहना था यदि उनके खिलाफ कुछ नहीं है तो फिर उन्हें बोर्ड के अध्यक्ष का कार्यभारत संभालने की अनुमति


दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि इस रिपोर्ट में श्रीनिवासन के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की गई है लेकिन जांच अभी भी जारी है और ऐसी स्थिति में उन्हें बीसीसीआइ के अध्यक्ष के रू प में काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि जांच समिति ने कुछ और समय देने का अनुरोध किया है क्योंकि वह इंगलैंड के दौरे पर गई टीम के कुछ खिलाड़ियों के बयान रेकार्ड करना चाहती है और कुछ व्यक्तियों की आवाज के नमूनों के मिलान की आवश्यकता है।

न्यायाधीशों ने कहा, ‘हमने रिपोर्ट देखी है। जांच पूरी करने के लिए दो महीने का समय तर्कसंगत नहीं लगता है। जिस तरह से सब कुछ हो रहा है उससे तो यही लगता है कि इसमें पांच साल लगेंगे। समिति के लिए यह चुनौती भरा काम है।’

कोर्ट ने अब इस मामले को सुनवाई के लिए दो नवंबर को सूचीबद्ध किया है लेकिन साथ ही जांच समिति को यदि आवश्यक हो तो अपनी अंतरिम रिपोर्ट दाखिल करने की भी अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति मुद्गल समिति ने 29 अगस्त को सीलबंद लिफाफे में अपनी अंतरिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी थी। यह समिति आइपीएल सट्टेबाजी और स्पाट फिक्सिंग प्रकरण के सिलसिले में श्रीनिवासन और 12 खिलाड़ियों की जांच कर रही है।

(भाषा)


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