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ओएनजीसी, कोल इंडिया और एनएचपीसी के विनिवेश को मंजूरी Print
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Thursday, 11 September 2014 08:49



जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। सरकार ने ओएनजीसी, कोल इंडिया और एनएचपीसी के विनिवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ओएनजीसी में अपनी पांच फीसद हिस्सेदारी का विनिवेश करेगी। इससे सरकारी खजाने में 18,000 करोड़ रुपए की प्राप्ति हो सकती है जबकि कोल इंडिया 10 फीसद हिस्सेदारी बेचेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में ओएनजीसी में अल्पांश हिस्सेदारी बिक्री को हरी झंडी दी गई। विनिवेश विभाग ने इस हफ्ते की शुरुआत में हिस्सेदारी बिक्री व्यवस्था के लिए पांच मर्चेंट बैंकर्स का चयन किया। इनमें सिटीग्रुप और एचएसबीसी सिक्युरिटीज, यूबीएस सिक्युरिटीज, आइसीआइसीआइ सिक्युरिटीज और कोटक महिंद्रा कैपिटल शामिल हैं। मर्चेंट बैंकर सरकार को इस बिक्री पेशकश के समय और तौरतरीकों पर सलाह देंगे और सरकार को बिक्री से ज्यादा से ज्यादा प्राप्ति हो, ऐसा प्रयास करेंगे।

ओएनजीसी में सरकार की हिस्सेदारी 68.94 फीसद है। सरकार ने ओएनजीसी में पांच फीसद हिस्सेदारी की बिक्री 2012 में 14,000 करोड़ रुपए में की थी। ओएनजीसी की इस बिक्री को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय की


भी सहमति है। अब मंत्रिमंडल ने भी इसे मंजूरी दे दी। सरकार ने कोल इंडिया लि. में बहुप्रतीक्षित 10 फीसद  

हिस्सेदारी बेचे जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। इससे सरकारी खजाने को 23,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद है। कोल इंडिया का शेयर 373.85 रुपए प्रति इक्विटी के भाव पर बंद हुआ। इस लिहाज से 10 फीसद हिस्सेदारी या 63.16 करोड़ शेयर बेचने से सरकारी खजाने को 23,000 करोड़ रुपए से अधिक मिलेंगे।

चालू वित्त वर्ष 2014-15 में सरकार ने सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 43,425 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। कोल इंडिया में 2013-14 में ही हिस्सेदारी बेचने की योजना थी लेकिन ट्रेड यूनियनों के कड़े विरोध के कारण इसे टाल दिया गया। कोल इंडिया में सरकार की 89.65 फीसद हिस्सेदारी है। मंत्रिमंडल ने जन धन योजना की प्रगति की समीक्षा की। सरकारी सूत्रों के अनुसार अब तक योजना के तहत तीन करोड़ बैंक खाते खोले गए। कैबिनेट ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक व्यापक दूरसंचार नीति को मंजूरी दी है।

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