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‘अधिशेष कोयला कोल इंडिया को भेजने से हो सकता है गुणवत्ता विवाद’ Print
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Friday, 05 September 2014 16:16


 नई दिल्ली। औद्योगिक नीति एवं संवर्द्धन विभाग (डीआईपीपी) ने आगाह करते हुए कहा है कि निजी इस्तेमाल वाली खानों से अधिशेष कोयला कोल इंडिया को स्थानांरित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इससे ईंधन की गुणवत्ता को लेकर विवाद तथा एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने में कोयले का नुकसान हो सकता है। 

   इससे पहले, बिजली मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि तीसरे पक्ष से कोयले की गुणवत्ता की जांच व्यवस्था के बावजूद कोल इंडिया द्वारा बिजली संयंत्रों को की जा रही कोयले की आपूर्ति निम्न कोटि वाली है और आपूर्ति में पत्थर भेजे जा रहे हैं। 

   डीआईपीपी ने कोयला मंत्रालय द्वारा निजी इस्तेमाल वाली खानों से उत्पादित अधिशेष कोयले के निपटान पर जारी मसौदा नीति पर दी गई अपनी टिप्पणी में कहा है, ‘‘जो अधिशेष कोयले का उत्पादन होता है, उसे ई-नीलामी के जरिये निपटान के लिये कोल इंडिया को नहीं भेजा जाना चाहिए क्योंकि इससे कई कठिनाइयां हो सकती हैं।’’

   विभाग ने कहा, ‘‘कोल इंडिया को अधिशेष कोयला भेजे जाने से कोयले की गुणवत्ता के


संदर्भ में विवाद हो सकता है और कोयले को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने में लदान-उतरान में नुकसान भी हो सकता है। इससे बिना किसी लाभ के लागत   में वृद्धि होगी।’’

   मसौदा नीति पर वाणिज्य मंत्रालय समेत विभिन्न मंत्रालयों से टिप्पणी मांगी गई थी।

   डीआईपीपी ने आगे यह भी कहा कि खानों से कोल इंडिया को अधिशेष कोयला भेजे जाने से मात्रा को लेकर भी विवाद हो सकता है। इसके अलावा जो मात्रा भेजी  गयी और जो मात्रा प्राप्त की गई, उसमें अंतर होने से कोल इंडिया तथा उसकी अनुषंगी इकाइयों एवं निजी कोयला खान आवंटियों के बीच विवाद हो सकता है। 

   सूत्रों के अनुसार निजी इस्तेमाल की खानों से अधिशेष कोयले के उपयोग के बारे  में नीति माह के अंत तक आ सकती है। नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न मंत्रालयों के बीच विस्तृत विचार विमर्श होगा।

(भाषा)


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