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जापान ने भारत के लिए खोला खजाना Print
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Tuesday, 02 September 2014 09:07


तोक्यो। भारत और जापान ने सोमवार को अपने संबंधों को ‘सामरिक वैश्विक भागीदारी’ से बढ़ा कर ‘विशेष सामरिक वैश्विक भागीदारी’ के स्तर पर ले जाने की का एलान किया। जापान ने कहा कि अगले पांच साल में वह भारत में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में 34 अरब डालर का निवेश करेगा। लेकिन दोनों देश के बीच असैन्य परमाणु समझौता नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के उनके समकक्ष शिंजो एबे ने शिखर वार्ता के दौरान अपनी सामरिक भागीदारी में द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के महत्त्व की पुष्टि की और रक्षा उपकरणों व प्रौद्योगिकी में सहयोग के विस्तार पर सहमति जताई।


मोदी की पांच दिवसीय जापान यात्रा के तीसरे दिन दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच शिखर वार्ता हुई। इसमें दोनों देश यूएस-2 नभ-जल विमान भारत को बेचने के लिए वार्ता तेज करने भी सहमत हुए। शिखर वार्ता के बाद संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में एबे ने घोषणा की कि भारत-जापान सहयोग की मिसाल के तौर पर तोक्यो भारत को वित्तीय, प्रौद्योगिकी और बुलेट ट्रेन के संचालन में सहयोग करेगा। एबे ने कहा कि जापान अपने पड़ोसियों से भारत को बेहतर कनेक्टिविटी भी प्रदान करवाएगा।

असैन्य परमाणु सौदे के संदर्भ में एबे ने कहा कि भागीदारी को मजबूत करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस समझौते से संबंधित वार्ता में तेजी लाई जाए। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि मोदी की जापान यात्रा के दौरान इस समझौते पर सहमति बन जाएगी। बताया जाता है कि अमेरिका के साथ हुए ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते की तर्ज पर जापान के साथ भी भारत ऐसा ही समझौता चाहता था। परमाणु सहयोग मुद्दे पर एबे ने कहा कि पिछले कई महीनों में इसमें ‘महत्त्वपूर्ण प्रगति’ हुई है। दोनों पक्षों ने मुद्दे को समझने के लिए आपस में बेबाक चर्चा की।

भारत-जापान निवेश संवर्धन भागीदारी के तहत जापान अगले पांच साल में भारत में स्मार्ट शहरों के निर्माण सहित ढांचागत परियोजनाओं में सहयोग के लिए 34 अरब डालर का निवेश करेगा। अन्य देशों को सहायता देने वाली जापान की सरकारी एजंसी ओडीए भी इसमें सहयोग करेगी। एबे ने कहा कि इन पांच सालों में भारत में जापान की कंपनियों की मौजूदगी भी दोगुनी हो जाएगी।

मोदी ने ये अवसर उपलब्ध कराने के लिए जापान के प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते


हुए कहा- हम दोनों ने संबंधों को ‘विशेष सामरिक और वैश्विक साझीदारी’ के स्तर तक उठाने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि उनकी जापान यात्रा से दोनों देशों के संबंधों का नया युग शुरू हुआ है और दोनों के बीच भागीदारी में कोई ‘सीमा’ नहीं है। 

मोदी ने कहा कि भारत और जापान प्राचीन मित्र हैं और उनकी यह यात्रा दोनों देशों को आपसी संबंधों का और विस्तार करने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि एशिया और विश्व में शांति व सुरक्षा के लिए ‘विकसित भारत और खुशहाल जापान’ महत्त्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि भारत और जापान दो बड़े लोकतंत्र हैं और वे दोनों एशिया की तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से हैं। मोदी ने कहा कि यह केवल संबंधों को एक श्रेणी से निकाल कर दूसरी श्रेणी में ले जाने का मामला नहीं है। हमारे संबंध केवल क्षेत्रीय आयाम वाले नहीं हैं बल्कि उनका वैश्विक प्रभाव है। उन्होंने कहा कि जापान के प्रधानमंत्री ने देश के समावेशी विकास की उनकी (मोदी की) सोच के अनुरूप भारत में हर क्षेत्र में सहयोग करने में सहमति जताई है।

एबे ने कहा- हम आपकी मदद करेंगे। साथ ही उन्होंने गंगा को साफ करने में सहयोग की भी पेशकश की। मोदी ने कहा कि यह भारत के प्रति उनके अनुराग और सम्मान का उदाहरण है।

दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फौरी सुधार के लिए दबाव डालते हुए इस वैश्विक संस्था को 21वीं सदी की वास्तविकताआें के प्रति कहीं अधिक प्रभावी और उत्तरदायी बनाने के लिए इसकी सदस्यता में विस्तार करने को लेकर द्विपक्षीय कोशिशों को बढ़ावा देने का भी फैसला किया। दोनों नेताओं ने 2015 में संयुक्त राष्ट्र के 70 वें स्थापना वर्ष तक इस दिशा में एक ठोस परिणाम निकालने की अपील की। साथ ही, इस सिलसिले में द्विपक्षीय कोशिशों को बढ़ावा देने और जी 4 की भी मदद लेने का फैसला किया। जी 4 के सदस्य देश ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान हैं। ये सभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएसएसी) में स्थायी सदस्यता के लिए एक दूसरे के दावे का समर्थन कर रहे हैं। 

(भाषा)


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