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चुनावों में पीपीपी का नेतृत्व करने के लिए मुझे राष्ट्रपति पद छोड़ देना चाहिए था: जरदारी Print
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Monday, 20 May 2013 13:22

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ जरदारी ने कहा है कि उन्हें हाल में संपन्न आम चुनावों में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी:)का बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था और पार्टी की प्रचार मुहिम का नेतृत्व करना चाहिए था।
जरदारी ने कल रात लाहौर स्थित अपने निजी आवास में दक्षिण एशियाई स्वतंत्र मीडिया संघ के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत करते हुए यह टिप्पणी की।
पिछले पांच वर्षों तक देश में सत्ता का नेतृत्व करने वाली पीपीपी को 11 मई को हुए चुनावों में पीएमएल-एन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था।
यह पूछे जाने पर कि 2013 के चुनावों में वह क्या अलग कर सकते थे, जरदारी ने उत्तर दिया कि वह चुनाव मुहिम तेज करने के लिए राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे सकते थे।
उन्होंने कहा कि उनके संवैधानिक पद के कारण और अन्य कई कारणों से पीपीपी की मुहिम नेतृत्वहीन हो गई थी।
जरदारी ने लाहौर उच्च न्यायालय के दबाव के कारण इस वर्ष की शुरूआत से राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना छोड़ दिया था। अदालत ने आदेश दिया था कि राष्ट्रपति को राजनीतिक मामलों में तटस्थ और निष्पक्ष होना चाहिए। वह पीपीपी की चुनावी मुहिम में हिस्सा नहीं ले पाए थे और उनके बेटे बिलावल भुट्टो-जरदारी को भी चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक तौर पर कभी नहीं देखा गया।
जरदारी ने कहा कि पीपीपी तालिबान की धमकियों के कारण पंजाब प्रांत में उचित मुहिम नहीं चला सकी और न्यायपालिका भी पार्टी के खिलाफ थी।
उन्होंने कहा, ‘‘ पार्टी एक साथ कई चुनौतियों से नहीं लड़ सकी।’’
जरदारी ने कहा कि चुनाव प्रचार जब अपने चरम पर था तो पीपीपी के शीर्ष नेता यूसुफ रजा गिलानी को अपना ध्यान अपने


पुत्र अली हैदर की ओर बटाना पड़ा जिनका अपहरण हो गया था।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजा परवेजÞ अशरफ अदालत में उनके खिलाफ चल रहे मुकदमों के खिलाफ लड़ रहे थे और अन्य शीर्ष नेता भी किसी न किसी कारणवश प्रचार मुहिम में शामिल नहीं हो पाए।
जरदारी ने पीपीपी के खराब प्रदर्शन के लिए उर्च्च्जा संकट को भी दोषी ठहराया। उन्होंने कहा, ‘‘ पीपीपी सरकार बिजली संकट का सामना नहीं कर पाई और यह पार्टी की हार का कारण बना।’’
उन्होंने चुनावों की पारदर्शिता पर आशंका जाहिर करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया में निर्वाचन अधिकारियों ने ‘अहम भूमिका’ निभाई। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में पीपीपी से कम से कम 45 सीटें ‘छीन’ ली गईं।
जरदारी ने इन रिपोर्टों को खारिज कर दिया कि पीपीपी की हार के बाद वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने कहा कि वह अपना संवैधानिक कार्यकाल पूरा करना चाहते है। उनका पांच वर्षीय कार्यकाल सितंबर में पूरा होगा।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ यदि मैंने चुनाव के दौरान इस्तीफा नहीं दिया तो अब इस्तीफा देने का कोई औचित्य नहीं है।’’
जरदारी ने साथ ही कहा कि वह चुनाव में जीत दर्ज करने वाले पार्टी के नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘ नेशनल असेम्बली में विपक्ष का नेता दूसरी सबसे बड़ी पार्टी से होगा। यदि पाकिस्तान तहरीक-ए- इंसाफ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनती है और विपक्ष का नेता उससे बनता है तो हमें कोई परेशानी नहीं होेगी।’’
पीपीपी आज एक बैठक में चुनाव में अपनी हार के कारणों पर विचार विमर्श करेगी।
भाषा

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