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किसानों ने रिण चुकाने के लिए प्रधानमंत्री से अंग बेचने की अनुमति मांगी Print
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Tuesday, 06 August 2013 17:40

चंडीगढ़। बैंक से लिया गया कर्ज चुकाने में नाकाम होने और अपनी दयनीय स्थिति दिखाने के लिए हरियाणा के किसानों के एक समूह ने प्रधानमंत्री से अपने महत्वपूर्ण अंग बेचने की अनुमति मांगी है।
भारतीय किसान यूनियन :टिकैत: के तत्वावधान में कल कुरूक्षेत्र में एक जनसभा करने वाले किसानों के समूह ने अपने अंगों की दर दर्शाने वाली तख्तियां दिखाईं।
बीकेयू की प्रदेश इकाई के प्रमुख गुरनाम सिंह ने आज फोन पर पीटीआई से कहा कि बाद में 33 किसानों ने प्रधानमंत्री को भेजने के लिए एक पत्र कुरूक्षेत्र के तहसीलदार को सौंपा।
उन्होंने कहा कि हमारे पास महत्वपूर्ण अंगों को बेचने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। देशभर में कर्ज के बोझ के कारण 20 हजार से अधिक किसानों ने अपनी जीवन लीला समाप्त की है। अपने अंग बेचने से कम से कम हम


कर्ज चुका पाएंगे तथा कुछ और वर्ष जीवन जीकर अपने परिवार का पालन पोषण कर पाएंगे।
सिंह ने दावा किया कि इन दिनों खेती लाभ नहीं देने वाला व्यवसाय हो गया है।
उन्होंने कहा कि गेंहू और धान जैसी खेती के लिए हमारी लागत करीब 1613 और 1757 रूपये आती है जबकि हमें 1350 और 1310 रूपये का समर्थन मूल्य मिलता है।
उन्होंने कहा कि हम अपनी जमीन नहीं बेच सकते क्योंकि यह हमारी मां की तरह है और यह हमें सदियों से भोजन दे रही है। हमने अपने अंग बेचने का फैसला किया है। यह खुदकुशी करने से बेहतर है इसके लिए हमने प्रधानमंत्री से अनुमति मांगी है।
(भाषा)

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