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बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है देश, निराशा का कोई कारण नहीं : प्रधानमंत्री Print
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Wednesday, 08 January 2014 15:53

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर प्रवासी भारतीयों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि देश ‘‘बेहतर भविष्य’’ की ओर बढ़ रहा है और वर्तमान के बारे में निराश होने या भविष्य के बारे में चिंता करने का कोई कारण नहीं है ।

 

उन्होंने यह भी कहा कि अगले चुनाव परिणाम पर ध्यान दिए बिना वे एक बार फिर भारत के लोकतंत्र और इसकी संस्थाओं की सामर्थ्य को प्रदर्शित करेंगे ।

मनमोहन ने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि आप में से बहुत से लोगों के मन में भारतीय अर्थवव्यवस्था के भविष्य के बारे में सवाल और सामाजिक चुनौतियों, हमारी राज्य व्यवस्था के आकार तथा हमारे देश में प्रशासन से जुड़े मुद्दों के बारे में चिंताएं हैं । भारत के बाहर कुछ तबकों में यह धारणा है कि देश पिछले एक दशक से अपनी गति खो रहा है ।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्दों को ‘‘भारत में राजनीतिक विवादों के जरिए’’ भी बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाता है जिसे आसन्न चुनावों को देखते हुए इस चुनावी मौसम में नि:संदेह ज्यादा जोर शोर से उठाया जाता है ।

उन्होंने यहां 12वें प्रवासी भारतीय दिवस कार्यक्रम में कहा, ‘‘मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे वर्तमान के बारे में निराश होने या भविष्य के बारे में चिंता का कोई कारण नहीं है । असल में, जैसा कि मैं पहले भी कह चुका हूं कि हम बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं और मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप इस देश के भविष्य से विश्वास और आशावाद के साथ जुड़े रहिए ।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बाह्य और घरेलू कारकों के बावजूद ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था के बुनियादी सिद्धांत मजबूत हैं ।’’

मनमोहन सिंह ने आज 12वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन करने के बाद भारतवंशियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था ने पिछले दशक में बेहतर प्रदर्शन किया है। 2004 के बाद से हमारी औसत विकास दर 7.9 प्रतिशत वार्षिक के स्तर पर रही। पिछले कुछ समय में आई मंदी को लेकर भी संदेह नहीं है और हम संभवत: इस साल के अंत में भी 5 प्रतिशत की विकास दर के साथ पिछले साल के स्तर पर ही रहेंगे।’’

उन्होंने अर्थव्यवस्था में मंदी के लिए घरेलू कारणों के साथ अनेक अंतरराष्ट्रीय कारकों को भी जिम्मेदार ठहराया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इन चुनौतियों के बावजूद हमारी अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। हमारी बचत और निवेश की दर अभी हमारी जीडीपी का 30 प्रतिशत से अधिक है और भारत में उद्यमशीलता की भावना भलीभांति जीवंत है।’’

शासन में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के संप्रग सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए सिंह ने कहा कि यह जटिल काम है क्योंकि भारतीय शासन व्यवस्था की संघीय प्रकृति का सम्मान करते हुए हमारी समृद्ध प्रक्रियाओं और प्रणालियों को दुरूस्त करना जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘शासन को मजबूत करना एक चालू प्रक्रिया है और हम कभी यह नहीं कह सकते कि हमने पर्याप्त काम कर लिया है। लेकिन मुझे विश्वास है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार, लोकपाल विधेयक, सरकारी खरीद विधेयक, प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन की प्रणाली में बदलाव और कानून प्रवर्तन तथा लेखा परीक्षण संस्थाओं को सशक्त बनाने जैसे कुछ कदम सरकार ने इस दिशा में उठाए हैं।

सिंह ने कहा कि इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव भारत की प्रगति की आधारशिला बनाने वाले इन आदर्शों की दीर्घकालिक प्रकृति को भी साबित करेंगे।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय के घटनाक्रम देश के लोकतंत्र के मजबूत होने की ओर इशारा करते हैं जो और अधिक सहभागिता वाला तथा संवाद वाला बन रहा है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह बहुत उत्साहजनक बात है कि सभी क्षेत्रों से हमारे युवा न केवल अपनी आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को स्पष्ट करते


हैं बल्कि भविष्य बनाने के लिए सक्रियता के साथ राजनीति में आते हैं। इसका स्वागत होना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देश में अनेक स्तरों पर हो रहे अद्भुत बदलाव हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं जिसमें हमारे लोगों की नई तथा उभरती चिंताओं, उम्मीदों और आकांक्षाओं को झलकाने की क्षमता है। मुझे विश्वास है और आपको भी होना चाहिए कि एक बहुलवादी लोकतंत्र के तौर पर हमारे देश का भविष्य सुरक्षित है।’’

मनमोहन ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में सरकार ने बड़ी बुनियादी परियोजनाओं को लागू करने, कर प्रशासन में सुधार करने, वित्तीय प्रबंधन को सुधारने, विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को उदार बनाने और प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन एवं उपयोग की प्रणाली को तर्कसंगत बनाने की गति बढ़ाने के लिहाज से व्यापक निर्णय लिए हैं।

संसद में रहने वाले गतिरोध के माहौल की ओर परोक्ष इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘वृहद राजनीतिक समर्थन से हम बड़े सुधार वाले विधेयक ला सकते हैं मसलन- वित्तीय और बीमा क्षेत्र में। हमारे फैसलों का प्रभाव पड़ना शुरू कर दिया है और भारत आकर्षक निवेश गंतव्य के तौर पर फिर से उभर रहा है। मुझे भरोसा है कि आप अगले कुछ महीने में इसे स्पष्ट तौर पर देखेंगे।’’

सिंह ने कहा कि भारत महत्वपूर्ण तरीके से बदल रहा है लेकिन उन लोगों को हमेशा यह नहीं दिखाई देता जो व्यापक परिप्रेक्ष्य में इसे नहीं देखते।

अपनी सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दस साल में भारत का संचार नेटवर्क तेजी से बढ़ा है और ग्रामीण भारत का बड़ा हिस्सा बहुत जल्दी ब्रॉडबैंड से जुड़ जाएगा। आज हजारों उच्च शिक्षा संस्थान नेशनल नॉलेज नेटवर्क का हिस्सा हैं। आज टेलीफोन सभी की पहुंच में है।

प्रधानमंत्री सिंह ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों की संख्या 17 से 44 हो गई है और आईआईटी तथा आईआईएम दोगुने हो गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर देखें तो लगभग हर बच्चा स्कूल जा रहा है। राष्ट्रीय कौशल विकास प्राधिकरण अगले पांच साल के लिहाज से मानवशक्ति तैयार करने के लिए 5 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने के मकसद से निजी क्षेत्र समेत अन्य पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने 17,000 किलोमीटर राजमार्गों को जोड़ा है और ग्रामीण भारत में 2 लाख किलोमीटर नयी सड़कों का निर्माण किया गया है। हमारी विद्युत उत्पादन की क्षमता तेजी से बढ़ रही है जिसमें सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं।’’

उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक विकास दर न केवल तेज हुई है बल्कि सामाजिक रूप से भी और अधिक समावेशी और क्षेत्रीय तौर पर अधिक संतुलित हो गई है।

सिंह ने कहा, ‘‘हमारी सरकार के लिए समावेशी विकास न केवल नैतिक अनिवार्यता या राजनीतिक जरूरत है बल्कि सतत दीर्घकालिक आर्थिक विकास और सामाजिक स्थिरता का आवश्यक तत्व भी है।’’

प्रधानमंत्री ने इस मौके पर पुस्तक ‘इनक्रेडिबिल अपॉर्चुनिटीज बैक होम’ का विमोचन भी किया जिसमें भारत में निवेश के अवसरों के संबंध में जानकारी है।?

प्रवासियों को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा कि हमारी सरकार ने सत्ता में आने के बाद प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय बनाया था। हमने हाल ही में महात्मा गांधी प्रवासी सुरक्षा योजना भी शुरू की है जिसका उद्देश्य विदेशों में कार्यरत भारतीय मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस साल दिल्ली में प्रवासी भारतीय केंद्र का निर्माण पूरा हो जाएगा। हम राज्य सरकारों को भी प्रवासी भारतीय भवनों की स्थापना में मदद करने के लिए एक योजना शुरू करना चाहते हैं।

(भाषा)

 

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