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24 घंटे के लिए गुजरात पुलिस के हवाले नारायण साईं Print
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Wednesday, 04 December 2013 19:44

नई दिल्ली। आसाराम के बेटे नारायण साई को दिल्ली की एक अदालत ने 24 घंटे के लिए गुजरात पुलिस की हिरासत में सौंपने की आज इजाजत दे दी। इससे बलात्कार के एक मामले में उसे सूरत में एक अदालत में पेश करने के लिए उसकी ट्रांजिट रिमांड तय हो गई है।

अदालत ने साई के साथ गिरफ्तार दो अन्य लोगों को भी ट्रांजिट रिमांड पर दे दिया है। इन सभी को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने आज तड़के दिल्ली-हरियाणा सीमा पर गिरफ्तार किया।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट धीरज मोर ने कहा कि वह सभी तीनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर 24 घंटे के लिए सौंपने की इजाजत देते हैं। यह अवधि शाम सात बजे से शुरू होगी।

हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि गुजरात पुलिस द्वारा केस डायरी और आरोपियों के बयान पेश करने पर ही वह आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे।

सूरत की अदालत में पेश होने की मांग करने वाली 40 वर्षीय साई की ट्रांजिट जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि उसके खिलाफ कुछ खास आरोप हैं और सूरत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) उसके खिलाफ वारंट जारी कर चुके हैं।

आरोपी के वकील ने इस बात का जिक्र किया कि सीजेएम के वारंट या आदेश के अनुपालन में वे अदालत में आत्मसमर्पण करने वाले थे।

जांच अधिकारी ने दलील दी कि वे लोग आरोपी को संबद्ध अदालत में पेश


करने के लिये गुजरात ले जाने हेतु परिवहन की व्यवस्था कर चुके हैं।

न्यायाधीश ने कहा कि बचाव पक्ष के वकील की दलील में दम नहीं है। हालांकि, अदालत खुद को ट्रांजिट रिमांड तक सीमित कर रही है।

अदालत के खचाखच भरे कमरे में सुनवाई के दौरान गुजरात पुलिस ने तीनों आरोपियों (नारायण साई और उसके सहयोगी रमेश मल्होत्रा तथा कौशल ठाकुर) की ट्रांजिट रिमांड मांगी।

गुजरात पुलिस ने अदालत को बताया कि कानून व्यवस्था की समस्या के चलते वे इस बात का खुलासा नहीं कर सकते कि 24 घंटे में वे आरोपी को गुजरात कैसे ले जाएंगे।

साई की ओर से पेश अधिवक्ता प्रदीप राणा ने गुजरात पुलिस की दलील का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को फंसाया गया है और वह अदालत में आत्मसमर्पण करने वाले थे।

राणा ने कहा, ‘‘मैं (नारायण साई) अदालत में आत्मसमर्पण करने वाला था। मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए उन्होंने (पुलिस) मुझे गिरफ्तार कर लिया।’’

दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि साई को उस वक्त गिरफ्तार किया गया जब वह पकड़े जाने से बचने के लिए सिख व्यक्ति के वेश में था। उसने लाल रंग की पगड़ी बांध रखी थी।

(भाषा)

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