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अनुच्छेद 370 पर नरेन्द्र मोदी ने पार्टी का रूख नरम नहीं कड़ा किया है :भाजपा Print
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Monday, 02 December 2013 18:19

नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 पर नरेन्द्र मोदी की ओर से भाजपा का रूख नरम किए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए मुख्य विपक्षी दल ने आज दावा किया कि वस्तुत: उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ने इस रूख और कड़ा किया है।

 

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली ने यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मोदी ने कल जम्मू की अपनी रैली में जिस लहजे में इस विषय पर अपनी बात कही, उसे मीडिया में दूसरे रूप में पेश किया गया।

सुषमा के अनुसार, ‘‘मोदी ने सवाल उठाया कि ‘अनुच्छेद 370 से कोई लाभ हुआ है या नहीं, यह तो बता दो। इस पर तो चर्चा कर लो।’ और इसी का उल्लेख करते हुए अब कहा जा रहा है कि मोदी ने अनुच्छेद 370 पर चर्चा कराने और पार्टी ने रूख में नरमी लाने की बात कही है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इससे रूख में नरमी नहीं आई बल्कि इससे रूख और कड़ा ही हुआ है।’’

जेटली ने संवाददाता सम्मेलन के अलावा अलग से जारी बयान में भी कहा, ‘‘किसी के भी द्वारा (मोदी के बयान की) यह व्याख्या करना गलत होगा इस बारे में भाजपा द्वारा बहस की चुनौती देना, अनुच्छेद 370 पर उसके रूख में नरमी का संकेत है।’’ मोदी ने अपने कल के बयान से उठे विवाद के बाद आज ट्वीट के जरिए सफाई देते हुए लिखा है कि उन्होंने तो अनुच्छेद 370 और कश्मीरी पंडितों की पीड़ा समेत अन्य मुद्दों पर व्यवहारिक और केंद्रित बहस कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमें न केवल अनुच्छेद 370 बल्कि जम्मू कश्मीर में समाज के एक वर्ग समेत अन्य मुद्दों पर व्यवहारिक एवं केंद्रित बहस कराने की जरूरत है।’’

इस मुद्दे को उठाने की श्रेय लेने का प्रयास करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘ मुझे इस बात की खुशी है कि अनुच्छेद 370 पर चर्चा कराने के मेरे आह्वान के बाद इस विषय पर लोगों, टीवी और सोशल मीडिया में काफी चर्चा हो रही है।’’

वहीं, अरूण जेटली ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि पृथक राज्य संबंधी नेहरूवादी दृष्टि ने जम्मू कश्मीर को 1953 से पूर्व का दर्जा देने, स्वशासन और यहां तक की आजादी की आकांक्षा को जन्म दिया है।

जेटली ने कहा कि इन विचारों के प्रवर्तकों ने जम्मू कश्मीर और शेष भारत के बीच संवैधानिक और राजनीतिक संबंधों को कमजोर किया है। पृथक राज्य का सफर अलगाववाद की ओर जाता है, एकजुटता की ओर नहीं। ‘‘ अनुच्छेद 370 पर बहस कराने की भाजपा की मांग को इस विषय


पर रूख में नरमी लाना समझना गलत होगा।’’

गौरतलब है कि मीडिया की खबरों के अनुसार, जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने के रूख में लचीलापन लाते हुए भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने कल कहा था कि इस बात पर बहस की जानी चाहिए कि संविधान के इस प्रावधान से राज्य को कोई फायदा हुआ है या नहीं ।

गुजरात के मुख्यमंत्री ने कहा था, ‘‘संविधान के अनुसार इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि अनुच्छेद 370 समाप्त हो या जारी रहे... कम से कम इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि अनुच्छेद 370 से जम्मू कश्मीर को फायदा हुआ है या नहीं।’’

जम्मू कश्मीर में राज्य से बाहर शादी के बाद वहां की लड़कियों के स्थायी निवासी के अधिकार के विषय पर मोदी के कल के बयान पर राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी नेताओं के बयान पर तीखा प्रहार करते हुए भाजपा नेता अरूण जेटली ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी ने लड़कियों को राज्य से बाहर शादी के बाद स्थायी निवासी का अधिकार बरकरार रखे जाने के अदालत के आदेश का विरोध किया था।

जेटली ने कहा कि राज्य के कानून की पिछले पांच दशकों से ऐसी व्याख्या की गई कि जम्मू कश्मीर से बाहर लड़की के विवाह करने पर उसका स्थायी निवासी का दर्जा और अन्य सुविधाएं समाप्त हो जायेंगी। हालांकि सात अक्तूबर 2002 में जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ ने बहुमत के फैसले में कहा कि राज्य के बाहर विवाह करने के बाद भी लड़कियों का स्थायी निवासी का दर्जा बरकरार रहेगा।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘ उस समय की नेशनल कांफ्रेंस सरकार का इस मामले में महाधिवक्ता एम ए गोनी ने प्रतिनिधित्व किया था और लड़कियों की अर्जी का पुरजोर विरोध किया था। इस विषय पर नेशनल कांफ्रेंस सरकार ने उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका भी दायर की थी।’’

जेटली ने कहा कि 2003 में कांग्रेस के सहयोग से पीडीपी की सरकार बनी और उसे वैकल्पिक रणनीति के तहत विशेष अनुमति याचिका वापस ले ली तथा जम्मू कश्मीर निवासी (आयोग्यता) विधेयक 2004 पेश किया। यह उच्च न्यायालय के बहुमत के आधार पर दिये गए फैसले को निरस्त करने का प्रयास था। इस विधेयक को नेशनल कांफ्रेस और पीडीपी ने समर्थन किया था। हालांकि यह विधान परिषद में पारित नहीं हो सका था।

(भाषा)

 

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