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रविवारीय कॉलम

प्राचीन भारत में गणराज्य

जनसत्ता 23 जून, 2013: अंग्रेजी शासन के अधिकारी और अंग्रेज लेखक ऐसे मंतव्य प्रकाशित करते रहते थे कि भारत में सदैव निरंकुश

 

धर्मनिरपेक्षता और सुशासन

तवलीन सिंह
जनसत्ता 23 जून, 2013: पहले मेरे साथ दुआ कीजिए उनके लिए जो अभी भी उत्तराखंड के पहाड़ों में बेसहारा, बेहाल

 
विवेकानंद की धर्म-दृष्टि

विवेकानंद की धर्म-दृष्टि

कुलदीप कुमार
जनसत्ता 16 जून, 2013: हमारे देश के कम्युनिस्ट आंदोलन के बारे में मुझे कई बातें कभी समझ में नहीं आर्इं।

 

रवींद्र नोबेल शती को यों मनाने के जोखिम

विष्णु खरे
जनसत्ता 16 जून, 2013: हमारे पिछले सत्तावन बरस के मित्र अशोक (वाजपेयी, ‘कभी-कभार’, जनसत्ता, 9 जून) ने ‘नोबेल

 

मूल्यांकन के अंतर्विरोध

उदयन वाजपेयी
जनसत्ता 16 जून, 2013: अगर किन्हीं जनवादी कविवर को किसी कवि की कविता नापसंद है, यह उनका अधिकार है। पसंद

 

अनूठा परिसर

अपूर्वानंद
जनसत्ता 16 जून, 2013: क्या  जेएनयू, यानी  जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दरिद्रता या दरिद्रतावाद की दलाल

 
कभी-कभार

कभी-कभार

अशोक वाजपेयी
आधिक्यके दुख
जनसत्ता 16 जून, 2013: हमारे यहां आधिक्य के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है: चीजों,

 

न ज्ञान न जीवन-कर्म

बजरंग बिहारी तिवारी
जनसत्ता 16 जून, 2013: दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रस्तावित चारवर्षीय स्नातक कार्यक्रम पर इन

 

दलित साहित्य की धुरी

जनसत्ता 16 जून, 2013: पिछले दो दशक के दौरान हिंदी साहित्य में कई महत्त्वपूर्ण विमर्श हुए हैं। इसी कड़ी में आंबेडकरवादी

 

यथार्थ से स्वप्न तक

जनसत्ता 16 जून, 2013: वर्ष 2001 में अपने पहले ही कविता संग्रह ‘अपने जैसा जीवन’ के साथ सविता सिंह ने अपनी जो एक अलग पहचान बनाई, वह 2013

 

मोदी का अर्थशास्त्र

तवलीन सिंह
जनसत्ता 16 जून, 2013: पिछले हफ्ते की राजनीतिक गतिविधियों के बाद एक बात बिल्कुल स्पष्ट हो गई है और वह यह कि

 
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सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?