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रविवारीय कॉलम

शिक्षा: मानविकी का संकट

अवधेश कुमार सिंह 
जनसत्ता 14 जुलाई, 2013: पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन कैरी की भारत यात्रा के दौरान शिक्षा

 

दलित चिंतन: दिखावे की संवेदना

सूरजपाल चौहान 
जनसत्ता 14 जुलाई, 2013: हिंदी साहित्य में अनेक साहित्यकारों ने दलित संवेदना पर लिखा है। उनके लेखन में दलितों की

 
वक्त की नब्ज़: बारिश और विकास

वक्त की नब्ज़: बारिश और विकास

तवलीन सिंह 
जनसत्ता 14 जुलाई, 2013: बारिश का मौसम है। गरम-गरम चाय की प्याली मेरी मेज पर है और खिड़की से नजारा बिल्कुल

 

पुस्कायन: अनुत्तरित स्त्री-प्रश्न

निरंजन देव शर्मा
जनसत्ता 14 जुलाई, 2013: युवा कथाकार मनीषा कुलश्रेष्ठ के संग्रह गंधर्व-गाथा की कहानियां अपने विकास

 

पुस्कायन: सिनेमा की राजनीति

जवरीमल्ल पारख
जनसत्ता 14 जुलाई, 2013: ऑस्कर पुरस्कार हर साल अमेरिकी संस्था ‘एकेडमी आॅफ मोशन पिक्चर्स आर्ट्स ऐंड

 

क्या निराला प्रगतिवादी थे?

शंकर शरण 
जनसत्ता 14 जुलाई, 2013: कवि ‘निराला’ का परिचय देते हुए प्राय: उन्हें प्रगतिशील कहा जाता है। वामपंथी अर्थ

 
दिखावे की फिक्र

दिखावे की फिक्र

कुलदीप कुमार
जनसत्ता 30 जून, 2013: चुनाव नजदीक आते ही विश्व हिंदू परिषद को अयोध्या में राममंदिर निर्माण की अपनी

 

बेवजह पलीता क्यों

जितेश कुमार
जनसत्ता 30 जून, 2013: लक्ष्मीधर मालवीय ने अपनी टिप्पणी ‘‘हिंदी’ ‘उर्दू’’ (9 जून) में जॉर्ज ग्रियर्सन के

 

आदिवासी असंतोष की जड़ें

महादेव टोप्पो
जनसत्ता 30 जून, 2013: तरुण विजय के लेख ‘जनजातियों में ही विद्रोह क्यों’ (जनसत्ता, 9 जून) के संदर्भ में

 

महानता का पक्ष

अपूर्वानंद
जनसत्ता 30 जून, 2013: प्रत्येक समाज में ऐसा समय आता है जब वह महानता से घबराने लगता है। क्षुद्रता की

 
कभी-कभार

कभी-कभार

अशोक वाजपेयी
अनुवाद का सम्मान
जनसत्ता 30 जून, 2013: संभवत: ऐसा और कोई देश नहीं है जहां पोलैंड की तरह उसके

 
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सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?