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जनतंत्र में प्रशासन

जनसत्ता 4 अगस्त, 2014 : युवाओं में

 

स्टेम सेल का खेल

जनसत्ता 4 अगस्त, 2014 : यूपीए सरकार ने

 

हिंदी से छल

जनसत्ता 2 अगस्त, 2014 : प्रभु जोशी का लेख ‘हिंदी के विस्थापन का दौर’ (31 जुलाई) पढ़ा। खेद की बात यह है कि हिंदी के कुछ ऐसे पक्षधर

 

अपराध और दंड

जनसत्ता 2 अगस्त, 2014 : भारतीय समाज में बलात्कार के प्रति जो नजरिया है उसे बदलने की सबसे ज्यादा जरूरत है। छिटपुट चोरी से

 

जल में जहर

जनसत्ता 1 अगस्त, 2014 : पीने के पानी में हानिकारक तत्त्वों का घुला होना एक बड़ी समस्या का रूप लेता जा रहा है। देश के विभिन्न

 

जान लेती खेती

जनसत्ता 1 अगस्त, 2014 : अफसोस की बात है कि जब देश की अर्थव्यवस्था को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है, किसानों की खुदकुशी की घटनाओं

 

सियासी बिसात

जनसत्ता 31 जुलाई, 2014 : आजकल बिहार की राजनीति में भी ब्रांडेड कंपनियों की तरह ‘ऑफर’ का दौर चल रहा है। एक सुबह एक

 

प्रपंचों से दूर

जनसत्ता 31 जुलाई, 2014 : महावीर सरन जैन का लेख ‘अपनी भाषा के सम्मान का प्रश्न’ (रविवारी जनसत्ता, 27 जुलाई) पढ़ा। वे बुद्धिजीवी

 

उम्मीद की खेती

जनसत्ता 30 जुलाई, 2014 : रमेश कुमार दुबे के विचार ‘खेती का संकट’ (चौपाल, 24 जुलाई) पढ़े। उनके साथ हम सबको यह समझना होगा कि किसी

 

हिंदी का प्रश्न

जनसत्ता 30 जुलाई, 2014 : इसमें कोई शक नहीं कि संघ लोक सेवा आयोग के अंगरेजी में बने प्रश्नपत्रों के हिंदी अनुवाद ज्यादातर

 

दंगों की राजनीति

जनसत्ता 30 जुलाई, 2014 : उत्तर प्रदेश के सारे दंगे राजनीतिक पार्टियों द्वारा प्रायोजित लगते हैं। इनका मकसद कुछ खास जातियों

 
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आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?