मुखपृष्ठ चौपाल
चौपाल

इन्हीं लोगों ने

जनसत्ता 21 अगस्त, 2014 : कश्मीर समस्या मेरे दादाजी के समय से चली आ रही है। इस बीच कई सरकारें आर्इं और चली गर्ईं मगर समस्या जस

 

साहित्य पर बाहुबली

जनसत्ता 20 अगस्त, 2014 : एक वक्त था जब वर्ष 1930 में बनी साहित्यकारों की संस्था ‘बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन’ को पूर्व

 

अनुचित संबोधन

जनसत्ता 20 अगस्त, 2014 : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का यह बयान कि भारत के सभी निवासियों को ‘हिंदू’ कहा

 

भाषाई गुलामी

जनसत्ता 19 अगस्त, 2014 : अशोक वाजपेयी ने ‘भारतीय भाषाओं को दोयम दरजा क्यों?’ (14 अगस्त) लेख में बहुत सटीक उदाहरणों और साफगोई के

 

लीक से परे

जनसत्ता 19 अगस्त, 2014 : एनके सिंह का लेख ‘भारतीय समाज की त्रिशंकु दशा’ (नौ अगस्त) पढ़ा। मैं लेखक से शत प्रतिशत सहमत हूं। नारी

 

कानून से ऊपर

जनसत्ता 19 अगस्त, 2014 : सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2014 में मध्यप्रदेश के अनुदान प्राप्त शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन भुगतान

 

नौकरशाही की जकड़बंदी

जनसत्ता 18 अगस्त, 2014 : सीसैट और उससे जुड़े भाषा-विवाद के पूरे प्रसंग से एक बात बिल्कुल साफ है कि भारतीय नौकरशाही भारत की

 

खामोशी का दायरा

जनसत्ता 18 अगस्त, 2014 : खामोशी के शिविर (अप्रासंगिक, 10 अगस्त) में अपूर्वानंद ने स्तब्धता के भेद बताते हुए ठीक ही कहा कि यह

 

अपराध की उम्र

जनसत्ता 16 अगस्त, 2014 : बीती छह अगस्त को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने किशोर न्याय (देखभाल

 

भगवा राष्ट्रवाद

जनसत्ता 16 अगस्त, 2014 : ‘चौपाल’ में विनोद कोचर का पत्र ‘राष्ट्रीय युद्ध स्मारक’ (11

 

किसकी आजादी

जनसत्ता 15 अगस्त, 2014 : अब तो रिजर्व बैंक के

 
«StartPrev12345678910NextEnd»

 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?