मुखपृष्ठ चौपाल
चौपाल

जनभाषा के साथ

जनसत्ता 12 सितंबर, 2014: हर लेखक समाज-द्रष्टा होता है। इस नाते यह अपेक्षित है कि वह उन मुद्दों पर अवश्य लिखे जिनका संबंध

 

संवाद से परहेज

जनसत्ता 12 सितंबर, 2014: पाकिस्तान के उच्चायुक्त ने हुर्रियत के नुमाइंदों को मुलाकात का न्योता ऐसे वक्त क्यों दिया, जब कुछ

 

न्याय का इंतजार

जनसत्ता 11 सितंबर, 2014: भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले पीठ ने विचाराधीन कैदियों के मामले में फैसला सुनाया है।

 

निरर्थक बातचीत

जनसत्ता 11 सितंबर, 2014: मधु किश्वर का लेख ‘कश्मीर का रुख समझने का जरूरत’ (5 सितंबर) काफी जानकारी लिए था। लेकिन उनका यह कहना कि

 

शिक्षा से दूर

जनसत्ता 9 सितंबर, 2014: इसे विडंबना नहीं तो क्या कहें कि सर्वशिक्षा अभियान, शिक्षा अधिकार कानून और 2015 तक सभी बच्चों को

 

हवा में जहर

जनसत्ता 9 सितंबर, 2014: राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश

 

नफरत के सौदागर

जनसत्ता 8 सितंबर, 2014: संप्रदाय के नाम पर समाज के ध्रुवीकरण का खेल खेलने में लगी दक्षिणपंथी शक्तियों की ओर से देश में ‘लव

 

शिक्षक की याद

जनसत्ता 8 सितंबर, 2014: शिक्षक दिवस पर मैंने भी एक सोशल-नेटवर्किंग साइट पर अपने पूज्य गुरुवर को ससम्मान याद किया। दरअसल, यह

 

कैसा शिक्षक दिवस

जनसत्ता 5 सितंबर, 2014: शिक्षक दिवस पर इस बार कुछ अभूतपूर्व होने जा रहा है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सभी स्कूलों

 

खाते का खेल

जनसत्ता 5 सितंबर, 2014: क्या बैंक खाते में रुपयों के बिना गरीब खरीदारी कर सकेगा? यदि ऐसा होता तो इस जनधन योजना की शुरुआत नहीं

 

इल्म से गुमराह

जनसत्ता 4 सितंबर, 2014: अख़लाक़ अहमद उस्मानी का लेख ‘लहू के दो रंग’ (2 सितंबर) पढ़ा। उन्होंने सही फरमाया कि भारत वहाबी चिंतन की

 
«StartPrev12345678910NextEnd»

 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?