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संपादकीय
  निवेश की कूटनीति

जनसत्ता 19 सितंबर, 2014: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भारत आने से ऐन पहले कहा था कि दोनों देश आपसी संबंधों का नया अध्याय लिखना चाहते हैं। स्वाभाविक ही इससे काफी आस जगी। पर क्या यह कहा जा सकता है कि वे

 

दुखद अध्याय

जनसत्ता 19 सितंबर, 2014: नेशनल बुक ट्रस्ट इंडिया की एक किताब से मेधा पाटकर पर लिखे पाठ को हटाया जाना एक अलोकतांत्रिक फैसला है। यह कदम इस ओर इशारा करता है कि सहिष्णुता और विचारों की स्वतंत्रता के लिए कैसी

 
आस और खटास

आस और खटास

जनसत्ता 18 सितंबर, 2014: पांच रोज पहले हुए उपचुनावों के नतीजे भाजपा के लिए दोहरी परेशानी लेकर आए हैं। इन नतीजों ने जहां विपक्ष का हौसला बढ़ाया है, वहीं भाजपा के सहयोगी दलों खासकर शिवसेना को भी सीटों के बंटवारे में अपनी

 

सहिष्णुता के शत्रु

जनसत्ता 18 सितंबर, 2014: हिंदुत्ववादी दक्षिणपंथी संगठनों का शैक्षणिक संस्थानों में जोर-जबर्दस्ती से अपने विचारों के अनुरूप नीतियां बनवाने, उन्हें लागू कराने का प्रयास पिछले कुछ सालों में ज्यादा उग्र हुआ

 
उपचुनावों के संकेत

उपचुनावों के संकेत

जनसत्ता 17 सितंबर, 2014: अक्सर यह कहा जाता है कि उपचुनाव के आधार पर कोई राजनीतिक निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। यह दलील अपनी जगह सही हो सकती है, जब इक्का-दुक्का सीट पर उपचुनाव हुए हों। लेकिन तेरह सितंबर को जिन सीटों पर

 

फीस की टीस

जनसत्ता 17 सितंबर, 2014: निजी स्कूलों की फीस का निर्धारण लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अभिभावक संघों और कुछ स्वयंसेवी संगठनों की शिकायत पर सर्वोच्च न्यायालय तक ने

 
पारदर्शिता का पक्ष

पारदर्शिता का पक्ष

जनसत्ता 16 सितंबर, 2014: राजनीतिक दलों को सूचना अधिकार अधिनियम के तहत लाने का मामला फिर से विवाद का विषय बन सकता है। गौरतलब है कि केंद्रीय सूचना आयोग ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पिछले साल जून में यह फैसला सुनाया था कि

 

मनमानी के विरुद्ध

जनसत्ता 16 सितंबर, 2014: यातायात-नियमों की अनदेखी पर जुर्माने के प्रावधान का अपेक्षित असर नजर नहीं आता। इसके मद्देनजर समय-समय पर जुर्माने की रकम बढ़ाई गई और कारावास की सजा आदि के कड़े नियम बनाए गए, पर उसका भी कोई खास नतीजा आ

 
दुरुस्त आयद

दुरुस्त आयद

जनसत्ता 15 सितंबर, 2014: प्रचलन से बाहर हो चुके कानूनों को रद््द करने की पहल देर से सही, एक दुरुस्त कदम है। ऐसे बहुत सारे कानून हमारी कानूनी किताबों में कायम हैं जो अंगरेजी हुकूमत के दौरान बने थे और जिन्हें बहुत पहले रद््द

 

वंचित बचपन

जनसत्ता 15 सितंबर, 2014: यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट दक्षिण एशिया के अन्य देशों के साथ-साथ भारत के लिए भी चिंताजनक है। इस रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में हर साल बीस लाख से ज्यादा बच्चे ऐसी बीमारियों की चपेट में आकर दम तोड़

 
सैलाब के सबक

सैलाब के सबक

जनसत्ता 12 सितंबर, 2014: जम्मू-कश्मीर में हालांकि बाढ़ का स्तर कुछ कम हुआ है, पर इसी के साथ त्रासदी की तस्वीर भी साफ होने लगी है। करीब तीन सौ लोगों की जान जा चुकी है। बाढ़ से घिरे हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

 
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