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उम्मीदों से आगे

धनंजय सिंह मलंग

जनसत्ता 2 जून, 2014 : 

 

अच्छे दिनों की सुबह

ब्रजेश कानूनगो

जनसत्ता 31 मई, 2014 : शयन कक्ष में अवस्थित पूर्व दिशा की खिड़की

 

गंगा का दुख

मधुर राय

जनसत्ता 30 मई, 2014 : ‘महाभारत’ की एक घटना आजकल अनजाने में बहुत प्रासंगिक हो चुकी है। स्वयंवर

 

पौरुष का दंश

संतोष कुमार

जनसत्ता 29 मई, 2014 : अपने आसपास अक्सर यह जुमला सुनने को मिल जाता है

 

तीसरा पक्ष

कौशलेंद्र प्रपन्न

जनसत्ता 28 मई, 2014 : हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने तीसरे लिंग के लोगों को अन्य

 

हरित क्षरित

प्रभांसु ओझा

जनसत्ता 27 मई, 2014 : कुछ दिनों पहले एक मित्र से बात हो रही थी। वे काफी संभ्रांत परिवार से

 

मुनाफे की शिक्षा

महेश चंद्र पुनेठा

जनसत्ता 26 मई, 2014 : हम एक ऐसे दौर में हैं, जबकि शिक्षा सृजनात्मकता और विवेकशीलता के

 

अंदेशों की आहट

राहिला परवीन

जनसत्ता 24 मई, 2014 : इस

 

प्यार की मार

अनामिका सिंह

जनसत्ता 23 मई, 2014 : एक कामकाजी मां-बाप का बेटा अर्पित बचपन से ही

 

सियासी बाबा

नीतू पांडेय

जनसत्ता 22 मई, 2014 : सियासत में जो लोग आपस में बदजुबानी करते हैं, एक दूसरे का चरित्र हनन करते

 

पूर्वोत्तर की पीड़ा

आलोक रंजन

जनसत्ता 21 मई, 2014 : मेरे भाई राजीव ने पूछा कि पूर्वोत्तर के लोग फिल्मों में क्यों नहीं आ

 
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