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बुलावे का इंतजार

ओम वर्मा

जनसत्ता 16 जून, 2014 : जरा-सी आहटें होती थीं तो लगता था कि कहीं ये वो तो

 

अपना कोना

श्वेता रानी खत्री

जनसत्ता 14 जून, 2014 : तारीख कुछ ठीक-ठीक याद नहीं, पर माहौल खूब याद है। रोज की तरह मैं

 

सेहत के सामने

आशुतोष कुमार सिंह

जनसत्ता 13 जून, 2014 : माननीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धनजी। किसी भी राज्य के

 

बाजार में शिक्षक

संजीव शर्मा

जनसत्ता 11 जून, 2014 : हाल ही में सीबीएसइ सहित देश के विभिन्न राज्य

 

संस्कृत का दायरा

आलोक रंजन

जनसत्ता 10 जून, 2014 : मेरे पिताजी संस्कृत विश्वविद्यालय के एक महाविद्यालय में पढ़ाते हैं। कह

 

विज्ञापन का परदा

केसी बब्बर

जनसत्ता 9 जून, 2014 : तीन महीने पहले जब चुनाव प्रचार शुरू हुए और आगे बढ़े तो टीवी समाचार

 

बेबस चीखें

दयाशंकर मिश्र

जनसत्ता 7 जून, 2014 : हम

 

इंसानियत का तकाजा

इति शरण

जनसत्ता 6 जून, 2014 : जीवन की व्यस्तता और उसके एक सामान्य निश्चित क्रम में चलने से कभी-कभी हम

 

विकास की आस

जय पांडेय

जनसत्ता 5 जून, 2014 : चुनावों के दौरान विभिन्न दलों के उम्मीदवारों ने अगर किसी पहाड़ी क्षेत्र

 

राजनीति में सपना

मिथलेश शरण चौबे

जनसत्ता 4 जून, 2014 : देश की दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियों की

 

सृजन के सरोकार

अरुण नारायण

जनसत्ता 3 जून, 2014 : सामाजिक न्याय और इस भावभूमि से आने वाले सभी तरह के विचारों और

 
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सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?