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काला धुआं

मनोज कुमार

जनसत्ता 28 जून, 2014 : 

 

तार-तार भरोसा

दयाशंकर मिश्र

जनसत्ता 27 जून, 2014 : मैं एनी गैथिगी जितना अभागा नहीं हूं,

 

धुएं में फिक्र

कविता रावत

जनसत्ता 26 जून, 2014 : 

 

लाचार बचपन

जावेद अनीस

जनसत्ता 25 जून, 2014 : किसी भी देश में बच्चों की स्थिति से वहां

 

सामंतवाद की सीमा

दिव्यांशु पटेल

जनसत्ता 24 जून, 2014 : एक तरफ जब लोग राष्ट्रपति के अभिभाषण

 

जीव-जगत की जुबान

प्रभांसु ओझा

जनसत्ता 23 जून, 2014 :  कुछ दिनों पहले राजस्थान के उदयपुर में

 

मुस्करा उठा दिन

गौतम राजरिशी

जनसत्ता 21 जून, 2014 : दिन उदास है थोड़ा कि आज नहाना है। नहीं, हफ्ते

 

खुशियों का बक्सा

प्रतीक माहेश्वरी

जनसत्ता 20 जून, 2014 : 

 

सच के सामने

अभय मिश्रा

जनसत्ता 19 जून, 2014 : हमलोग उन्हें पिताजी क्यों कहते थे, पता नहीं! यह

 

सपने में सपना

वाणभट्ट

जनसत्ता 18 जून, 2014 : एक दिन सपने में देखा सपना। सपने में सपना इसलिए कि

 

ठगी के रास्ते

ललित फुलारा

जनसत्ता 17 जून, 2014 : ठग प्रयोगधर्मिता में माहिर होते हैं। उनके

 
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सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?