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मेरी तरह काला

कृति श्री
जनसत्ता 2 अगस्त, 2013: पिछले साल छब्बीस फरवरी की रात अमेरिका के ‘फ्लोरिडा’ शहर में ट्रायवान मार्टिन नामक व्यक्ति को

 

शर्तें लागू

अनूप शुक्ल 
जनसत्ता 1 अगस्त, 2013: आजकल मीडिया में खाने वाले बयान का हल्ला है। बमचक मची है। कोई कहता है बारह रुपए में खा सकते हैं,

 

हाशिये के मिल्खा

अविनाश कुमार चंचल
जनसत्ता 31 जुलाई, 2013: बिहार में अपने एक साल के खेल पत्रकारिता के अनुभव से यही जाना है कि इस देश के

 

दोस्ती का दायरा

संजीव शर्मा 
जनसत्ता 30 जुलाई, 2013: दिल्ली की जीवन रेखा बन चुकी नए जमाने की मेट्रो ट्रेन में चढ़ते ही एक संदेश सुनाई

 

जीवन के रंग

फ़िरदौस ख़ान
जनसत्ता 29 जुलाई, 2013: मानव सभ्यता में रंगों का काफी महत्त्व रहा है। हर सभ्यता ने रंगों को अपने तरीके से

 

एक पुराना पत्र

प्रभात कुमार उपाध्याय 
जनसत्ता 26 जुलाई, 2013: पिछले दिनों गांव गया था तो एक दिन बक्से में से पुराने दस्तावेजों को

 

सेवा का तार

गौरव कुमार
जनसत्ता 25 जुलाई, 2013: नवीन तकनीकों के आगमन से जितनी खुशी हमें होती है, उससे कहीं ज्यादा गम पारंपरिक और

 

तंत्र की तह में

मनीष स्वामी 
जनसत्ता 24 जुलाई, 2013: देश की शीर्ष अदालत के पिछले दो फैसलों को देखते हुए लगता है मानो उसने रौद्र रूप धारण कर रखा

 

सरहद की सुरक्षा

मनीषा ‘सुरंजनी’ शर्मा
जनसत्ता 23 जुलाई, 2013: कुछ समय पहले देश में सेना और सरकार के संबंधों में शायद आजादी के बाद

 

माध्यम बनाम सरोकार

संतोष त्रिवेदी 
जनसत्ता 22 जुलाई, 2013: कई बार यह बहस उठती है कि अभिव्यक्ति के लिए कौन-सा माध्यम उचित है या सबसे उत्तम

 

भरोसे की भावनाएं

रिम्मी 
जनसत्ता 19 जुलाई, 2013: भावनाएं कभी किसी को किसी के इतना करीब ले आती हैं कि कोई रिश्ता न होने के बावजूद वह

 
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सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?