मुखपृष्ठ दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे

एक चूहे की मौत

राजकिशोर

जनसत्ता 6 अगस्त, 2014 : मैं एक मामूली चूहे का शोकगीत लिखने जा रहा हूं, जो चूहे की ही मौत मरा। मैंने उस चूहे को

 

रौब की सवारी

अरुणेंद्र नाथ वर्मा

जनसत्ता 5 अगस्त, 2014 : देश को स्वतंत्रता मिली पर विदेशी सांचे में ढले शक्तिशाली वंश लुप्त हो

 

फिर शुरू हुआ जीवन

विजया सती

जनसत्ता 2 अगस्त, 2014 : लगभग चार महीने बाद अब भाषा की यह लय हमारे लिए सुपरिचित हो गई है- अन्योंहासेयो, यानी

 

सरकार के सलाहकार

यशवंत कोठारी

जनसत्ता 31 जुलाई, 2014 : सरकार है तो सलाहकार भी है। ऐसी किसी सरकार की कल्पना नहीं की जा सकती है, जिसके पास

 

गांधी और गाजा

विनोद कुमार

जनसत्ता 29 जुलाई, 2014 : हमारे बहुत सारे युवा मित्र गाजा में हो रही घटनाओं से बेहद व्यथित

 

निशाने पर मासूम

लक्ष्मीकांता चावला

जनसत्ता 26 जुलाई, 2014 : सत्ता के गलियारों में आजकल

 

वात्सल्य का मोल

रीतारानी पालीवाल

जनसत्ता 4 अगस्त, 2014 :  

 

अदृश्य जंजीरें

राज कुमारी

जनसत्ता 1 अगस्त, 2014 : हिंदी फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री विद्या बालन अपने सामाजिक सरोकारों के चलते

 

इतिहास पर परदा

निवेदिता सिंह

जनसत्ता 30 जुलाई, 2014 : कहते हैं कि इतिहास बदला नहीं जा सकता। जो बीत चुका हो, उस पर किसका

 

नायक खलनायक

संजीव चंदन

जनसत्ता 28 जुलाई, 2014 : हम सवर्ण थे, इसलिए सवर्णों के टोले में रहते थे। हमारा गांव ‘हिट लिस्ट’ में था, ऐसी

 

कला का जीवन

मंजुल भारद्वाज

जनसत्ता 25 जुलाई, 2014 : सत्ता हमेशा कलाकार से डरती है, चाहे वह सत्ता

 
«StartPrev12345678910NextEnd»

 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?