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यादों में: 'सत्यजीत रे'

यथार्थवादी धारा की फिल्मों को नई पहचान दिलाने वाले सत्यजीत रे 20वीं सदी में विश्व की महानतम फिल्मी हस्तियों में एक थे, जिन्हें सर्वोत्तम फिल्म निर्देशकों में गिना जाता है और जिन्होंने भारतीय सिनेमा को विश्व में अलग पहचान दिलाई। देखिये उनकी कुछ फिल्मों की एक झलक। (तस्वीरे: एक्सप्रेस आर्काइव)

 

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सत्यजित रे एक ऐसे भारतीय फ़िल्म निर्देशक थे, जिन्हें 20वीं शताब्दी के सर्वोत्तम फ़िल्म निर्देशकों में गिना जाता है।
सत्यजित रे एक ऐ...
इनका जन्म कला और साहित्य के जगत में जाने-माने कोलकाता (तब कलकत्ता) के एक बंगाली परिवार में हुआ था। इनकी शिक्षा प्रेसिडेंसी कॉलेज और विश्व-भारती विश्वविद्यालय में हुई।
इनका जन्म कला औ...
यह फ़िल्म अपराजितो और अपुर संसार के साथ इनकी प्रसिद्ध अपुत्रयी में शामिल है।
यह फ़िल्म अपराज...
अभिनेत्री आशा पारेख के साथ सत्यतजीत रे।
अभिनेत्री आशा प...
सत्यजीत रे फ़िल्म निर्माण से सम्बन्धित कई काम ख़ुद ही करते थे—पटकथा लिखना, अभिनेता ढूंढना, पार्श्व संगीत लिखना, चलचित्रण, कला निर्देशन, संपादन और प्रचार सामग्री की रचना करना।
सत्यजीत रे फ़िल...
1949 में रे ने दूर की रिश्तेदार और लम्बे समय से उनकी प्रियतमा बिजोय राय से विवाह किया। इनका एक बेटा हुआ, सन्दीप, जो अब ख़ुद फ़िल्म निर्देशक है।
1949 में रे ने ...
फ़िल्में बनाने के अतिरिक्त वे कहानीकार, प्रकाशक, चित्रकार और फ़िल्म आलोचक भी थे।
फ़िल्में बनाने ...
1947 में चिदानन्द दासगुप्ता और अन्य लोगों के साथ मिलकर राय ने कलकत्ता फ़िल्म सभा शुरु की, जिसमें उन्हें कई विदेशी फ़िल्में देखने को मिलीं।
1947 में चिदानन...
 रे को जीवन में कई पुरस्कार मिले जिनमें अकादमी मानद पुरस्कार और भारत रत्न शामिल हैं।
रे को जीवन में...
1963 में फ़िल्म घरे बाइरे पर काम करते हुए राय को दिल का दौरा पड़ा जिससे उनके जीवन के बाकी 9 सालों में उनकी कार्य-क्षमता बहुत कम हो गई।
1963 में फ़िल्म...
 इन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत पेशेवर चित्रकार की तरह की। फ़्रांसिसी फ़िल्म निर्देशक ज़ाँ रन्वार से मिलने पर और लंदन में इतालवी फ़िल्म लाद्री दी बिसिक्लेत (Ladri di biciclette, बाइसिकल चोर) देखने के बाद फ़िल्म निर्देशन की ओर इनका रुझान हुआ।
इन्होंने अपने ...
इनकी पहली फ़िल्म पथेर पांचाली। इस फिल्म को कान फ़िल्मोत्सव में मिले “सर्वोत्तम मानवीय प्रलेख”पुरस्कार को मिलाकर कुल 11 अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले।
इनकी पहली फ़िल्...
घरे बाइरे का छायांकन राय के बेटे की मदद से 1984 में पूरा हुआ। 1992 में हृदय की दुर्बलता के कारण राय का स्वास्थ्य बहुत बिगड़ गया, जिससे वह कभी उबर नहीं पाए।
घरे बाइरे का छा...
मृत्यु से कुछ ही हफ्ते पहले उन्हें सम्मानदायक अकादमी पुरस्कार दिया गया।
मृत्यु से कुछ ह...
रे ने अपने जीवन में 37 फिल्मों का निर्देशन किया, जिनमें फिचर फ़िल्में, वृत्त चित्र और लघु फिल्में शामिल हैं।
रे ने अपने जीवन...
शतरंज के खिलाड़ी सत्यजीत रे द्वारा निर्देशित पहली गैर बंगाली भाषा की फिल्म थी ! फिल्म 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से एक साल पहले की प्रष्ठभूमि पर है
शतरंज के खिलाड़ी...
 भारत में भी वे अक्सर शहर के भागम-भाग वाले माहौल से बचने के लिए दार्जीलिंग या पुरी जैसी जगहों पर जाकर एकान्त में कथानक पूरे करते थे।
भारत में भी वे...

 

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