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नाम बताने से विसलब्लोअर की जान को हो सकता है खतरा PDF Print E-mail
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Friday, 19 September 2014 09:20


जनसत्ता ब्यूरो

 नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक रंजीत सिन्हा पर 2जी स्पेट्रम और कोयला खदान आबंटन मामले के आरोपियों को बचाने का आरोप लगाने वाले गैर सरकारी संगठन ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को उस विसलब्लोअर का नाम बताने से इनकार कर दिया जिसने निदेशक के खिलाफ दस्तावेज मुहैया कराए थे। इस संगठन का कहना है कि ऐसा करने से कई लोगों की जिंदगी को खतरा हो सकता है। 

गैरसरकारी संगठन पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशंस ने सत्येंद्र दुबे सहित कई विसलब्लोअर की हत्या की घटनाओं का हवाला देते हुए हलफनामे में कहा है कि सूचना प्रदान करने वाले स्रोत की जानकारी देना सिर्फ विश्वासघात ही नहीं बल्कि यह ऐसे लोगों की जान जोखिम में डालने वाला हो सकता है या फिर उनका शोषण हो सकता है।

संगठन ने वकील प्रशांत भूषण के माध्यम से दाखिल हलफनामे में कहा है कि इस मामले की गतिविधियों के मद्देनजर संगठन के संचालक मंडल की बैठक 17 सितंबर को हुई थी। इस बैठक में सदस्यों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया कि स्रोत की पहचान का खुलासा नहीं किया जाएगा। हलफनामे में कहा गया है कि सिन्हा के खिलाफ आरोप सही है और सीबीआइ के अपने दस्तावेज से इनकी आसानी से पुष्टि की जा सकती है। हलफनामे में कहा गया है कि अदालत इसके लिए 2जी मामले के विशेष लोक अभियोजक की मदद ले सकता है।

हलफनामे के अनुसार जहां तक आगंतुक रजिस्टर में मुलाकातों का सवाल है तो सीबीआइ निदेशक के


घर पर तैनात आइटीबीपी और सीबीआइ के रक्षकों से पूछताछ करके इसकी पुष्टि की जा सकती है। जिसकी सूची पहले ही अदालत को मूल प्रवेश रजिस्टर के साथ सौंपी जा चुकी है। संसद ने हाल ही में विसल ब्लोअर संरक्षण कानून, 2011 बनाया है। जिसमें विसल ब्लोर की पहचान गोपनीय रखने का प्रावधान है बशर्ते वह खुद ही अपनी पहचान सार्वजनिक न कर दे या फिर वह यह कहे कि पहचान के खुलासे पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।

 गैर सरकारी संगठन ने कहा है कि जैन डायरी, राडिया टैप और 2जी प्रकरण जैसे कई मामलों में शीर्ष अदालत ने सूचना के स्रोत की जानकारी मांगे बगैर ही जांच के आदेश दिए हैं और इस मामले में भी ऐसा ही किया जा सकता है। हलफनामे में कहा गया है कि जब कभी भी अदालत के अंत:करण को चुनिंदा आरोपों के बारे में संतुष्टि हो जाती है तो वह प्राधिकारियों को रिकार्ड पेश करने का निर्देश देती है और पहले भी कई मामलों में उसने जांच के आदेश दिए हैं। 

इस संगठन ने अदालत के पांच सितंबर के आदेश के बाद यह हलफनामा दाखिल किया। अदालत ने इस संगठन को उस विसलब्लोअर के बारे में सीलबंद लिफाफे में जानकारी देने का निर्देश दिया था। जिसने सीबीआइ निदेशक के निवास की आगंतुकों की सूची और दस्तावेज मुहैया कराए थे।

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