मुखपृष्ठ
Bookmark and Share
हेमा मालिनी के बयान पर भड़के एनजीओ, कहा: विधवाओं पर आंच नहीं आने देंगे PDF Print E-mail
User Rating: / 0
PoorBest 
Thursday, 18 September 2014 14:13


नई दिल्ली। वृंदावन की विधवाओं पर सांसद हेमा मालिनी के बयान को ‘असंवेदनशील’ करार देते हुए वहां सक्रिय गैर सरकारी संगठनों ने कहा है कि वे इन विधवाओं पर आंच नहीं आने देंगे और उनके भीतर से असुरक्षा की भावना भी निकालेंगे ।


     हेमा ने कल बेहद विवादास्पद बयान में कहा था ,‘‘वृंदावन की विधवाओं की अच्छी आय और बैंक बैलेंस होने के बावजूद वे आदतन भीख मांगती हैं । बंगाल, बिहार से विधवाओं को वृंदावन आकर भीड़ नहीं बढानी चाहिए। वे अपने राज्य में ही रहें।’’

     वृंदावन में चौदह साल पहले विधवा आश्रम ‘आमार बाड़ी (अब मां धाम) की स्थापना करने वाले ‘गिल्ड आफ सर्विस’ एनजीओ की संस्थापक अध्यक्ष डाक्टर वी मोहिनी गिरी ने कहा कि हेमा ने इस बयान से हजारों विधवाओं की उम्मीदें तोड़ दी हैं । 

     उन्होंने भाषा से कहा ,‘‘यह बेहद असंवेदनशील बयान है । क्या विधवाओं की कोई गरिमा नहीं होती । कल को मुझसे कहा जायेगा कि तुम विधवा हो और दिल्ली छोड़कर आंध्रप्रदेश लौट जाओ तो मैं क्या करूंगी । इस तरह का बर्ताव कहां तक जायज है।’’

      उन्होंने कहा ,‘‘ हेमा ने विधवाओं की उम्मीदें तोड़ी हैं। एक महिला होकर वह उनका दर्द नहीं समझ सकीं। वह सांसद हैं और उन्हें विधवाओं को सामाजिक सुरक्षा दिलानी चाहिए थी। मैने उन्हें तीन पत्र लिखे और कल टका सा जवाब मिला कि मेरे पीए से बात करो। लेकिन मैं हार नहीं मानूंगी। मैं सुनिश्चित करूंगी कि वृंदावन की विधवाओं पर आंच नहीं आए।’’

     उन्होंने बताया कि ये विधवायें बरसों से वृंदावन में रह रही हैं और बंगाल लौटना नहीं चाहती ।

    गिरि ने कहा ,‘‘मैने 20 साल पहले पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु से इस बारे में बात की थी, जिन्होंने विधवाओं को छत और 300 रूपये प्रतिमाह पेंशन देने का वादा किया था । मैने इन विधवाओं का सर्वे कराया और एक ने भी


बंगाल लौटने की इच्छा नहीं जताई ।’’

     उन्होंने कहा ,‘‘यदि हेमाजी को लगता है कि उनके रहने से व्यवधान पैदा होता है तो पिछले दस साल से मंदिरों में जाकर वह क्यों आम जनता के लिये दर्शन में मुश्किलें पैदा कर रही हैं । वह क्यो मुंबई में रहती हैं जबकि उनका घर तमिलनाडु में है । भारत में हर व्यक्ति को कहीं भी रहने का अधिकार है ।’’

      उन्होंने कहा कि वह वृंदावन की हर विधवा को मतदाता पहचान पत्र दिलाने के लिये बड़े पैमाने पर अभियान चलाएंगी ।

     उन्होंने कहा ,‘‘ हमारा पहला मिशल हर विधवा को मतदाता पहचान पत्र दिलाने का होगा । इसके अलावा उन्हें भयमुक्त भी करना है । हेमाजी के इस बयान के बाद स्थानीय प्रशासन विधवाओं के लिये मुश्किलें खड़ी कर देगा । वैसे भी उनसे भीख के पैसे तक छीन लिये जाते हैं और पुलिस डंडे बरसाने से भी नहीं हिचकिचाती।’’

     राधाकुंड पर मैत्री आश्रम चलाने वाले गैर सरकारी संगठन ‘मैत्री इंडिया’ की सीईओ सोनल सिंह वाधवा ने कहा कि इस तरह के बयान देने से पहले इन विधवाओं के सामाजिक और सांस्कृतिक हालात को समझना जरूरी है ।

      उन्होंने कहा ,‘‘वे अपनी मर्जी से वृंदावन नहीं आईं, बल्कि परिवार द्वारा त्यागे जाने के बाद काशी या वृंदावन में पनाह ली है । यह काफी संवेदनशील मसला है । उनके सामाजिक ढांचे में विधवाओं के लिये कोई जगह नहीं है और जहां वे दशकों से रह रही हैं, उन्हें वहां से बाहर करने की बात उनकी रही सही गरिमा भी छीन लेने जैसी है ।’’

      उन्होंने कहा ,‘‘ ऐसे हालात में कोई नहीं रहना चाहता और ना ही कोई आदतन भीख मांगना चाहता है । उनके प्रति संवेदनशील रवैया होना चाहिए।’’

(भाषा)

    


आपके विचार

 
 

आप की राय

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि 'भाजपा के झूठे सपने के जाल में आम जनता फंस गई है' क्या आप उनकी बातों से सहमत हैं?