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भाजपा पर भारी पड़ा उपचुनाव: पार्टी के कब्जे वाली 23 सीटों में से 13 हाथ से फिसलीं PDF Print E-mail
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Wednesday, 17 September 2014 08:33



जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। चार महीने पहले हुए लोकसभा चुनाव में जबर्दस्त जन समर्थन देने वाले उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में हाल में हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। पार्टी को अपने कब्जे वाली 23 सीटों में से 13 पर हार का मुंह देखना पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की कसौटी के रूप में देखे जा रहे इस उपचुनाव के नतीजे भाजपा के लिए निराशाजनक रहे हैं। जबकि पिछले दो महीने में बिहार, उत्तराखंड, कर्नाटक और मध्यप्रदेश में हुए उपचुनाव में भी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। 

नौ राज्यों में 32 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के लिए मंगलवार को वोटों की गिनती हुई। भाजपा ने इनमें से 12 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि कांग्रेस को सात और सपा को आठ सीटें मिली। तेदेपा, तृणमूल कांग्रेस, एआइयूडीएफ और माकपा को एक-एक सीट मिली है। सिक्किम की इकलौती सीट निर्दलीय के खाते में गई। अलबत्ता छत्तीसगढ़ की अंतागढ़ सीट पर मतगणना 20 सितंबर को होगी। यह सीट अभी भाजपा के पास है।  कुछ माह पहले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा और उसके सहयोगी दल ने 80 में से 73 सीटों पर जीत दर्ज की थी, पर मंगलवार को सामने आए विधानसभा उपचुनाव के परिणाम से भाजपा को झटका लगा है और पार्टी को अपने कब्जे वाली 11 सीटों में से आठ पर हार का मुंह देखना पड़ा है। इसमें एक सीट भाजपा की सहयोगी अपना दल के पास थी। 

विधानसभा उपचुनाव में बसपा की अनुपस्थिति के कारण राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण इस राज्य में सपा और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला था। पर ‘लव जेहाद’ के मुद्दे से भाजपा को चुनाव में कोई फायदा नहीं मिला। विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को राजस्थान में गहरा धक्का लगा है। जहां पार्टी चार में से तीन सीटों पर कांग्रेस से पराजित हो गई। कांग्रेस गुजरात में भी नौ विधानसभा सीटों के लिए हुए उपचुनाव में तीन सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही। जहां 12 बरसों में पहली बार नरेंद्र मोदी के बिना चुनाव हुए थे। 

उत्तर प्रदेश  की   11 सीटें, गुजरात की नौ सीटें और राजस्थान की चार सीटें भाजपा के पास थीं और इन सीटों पर पार्टी विधायकों के लोकसभा के लिए चुने जाने के कारण उपचुनाव की नौबत आई। उपचुनाव में भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन के बीच कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे सांप्रदायिक ताकतों की पराजय करार दिया है। इनका कहना है कि लोगों ने नरेंद्र मोदी सरकार और भाजपा की ध्रुवीकरण की राजनीति को खारिज कर दिया है। महाराष्ट्र और हरियाणा में आसन्न विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद कर रही भाजपा ने खुद भी कहा कि उपचुनाव के परिणाम उसकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं है और लोगों ने स्थानीय मुद्दों पर वोट दिया है। भाजपा के लिए संतोष की बात केवल यह रही कि उसने इस बार पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रवेश कर लिया। भाजपा उम्मीदवार शामिक भट्टाचार्य ने 24 परगना जिले में बशीरहाट दक्षिण सीट पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व फुटबाल खिलाड़ी दीपेन्दु विश्वास को 1742 वोट से पराजित किया। पहले यह सीट माकपा के पास थी। लोकसभा उपचुनाव में वडोदरा सीट पर भाजपा उम्मीदवार रंजनबेन भट्ट ने कांग्रेस के नरेंद्र रावत को 3,29,507 मतों के अंतर से पराजित किया। वडोदरा सीट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खाली की थी और उन्होंने वाराणसी सीट बरकरार रखी थी।


भट्ट को 5,26,763 वोट मिले जबकि रावत को 1,97,256 वोट मिले। 

समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली मैनपुरी सीट पर पार्टी उम्मीदवार और मुलायम सिंह यादव के पोते तेज प्रताप सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य को 3.21 लाख वोट के अंतर से पराजित किया। मैनपुरी सीट मुलायम सिंह यादव ने खाली की थी और आजमगढ़ सीट अपने पास रखी थी। मुलायम ने यह सीट 3.64 लाख मतों के अंतर से जीती थी। 

तेलंगाना में टीआरएस ने मेडक सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। पार्टी उम्मीदवार के प्रभाकर रेड्डी ने यहां तीन लाख 61,277 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। रेड्डी को पांच लाख 71,800 मत मिले जबकि कांग्र्रेस की वी सुनीता लक्ष्मा रेड्डी को दो लाख 10,523 वोट मिले। भाजपा के टी जयप्रकाश रेड्डी को एक लाख 86,334 मत मिले। 

यह सीट के चंद्रशेखर राव ने खाली की थी। जो बाद में राज्य के मुख्यमंत्री बने। राव ने मई में हुए चुनाव में 3.97 लाख मतों से जीत दर्ज की थी। गुजरात में भाजपा ने छह और कांग्रेस ने तीन सीटें जीती हैं जबकि राजस्थान में कांग्रेस ने तीन और भाजपा ने एक सीट पर जीत दर्ज की है। आंध्र प्रदेश में तेदेपा ने नंदीगामा सीट पर कब्जा बरकरार रखा है। 

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट मिली। भाजपा ने पूर्वी क्षेत्र में बढ़त बनाई और कांग्रेस से असम की सिलचर सीट छीन ली। असम में एआइयूडीएफ और कांग्रेस ने क्रमश: जमुनामुख और लखीपुर सीट पर कब्जा बरकरार रखा। 

उधर, माकपा ने त्रिपुरा की मनु (सु) सीट पर जीत दर्ज की जबकि सिक्किम में रांगांग यांगांग विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के भाई और निर्दलीय उम्मीदवार आरएन चामलिंग ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एसडीएफ उम्मीदवार को 708 मतों से पराजित किया।

पिछले महीने बिहार में विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को राजद-जद (एकी) गठबंधन से 4-6 से पराजय का सामना करना पड़ा था जबकि कर्नाटक और मध्यप्रदेश में उसे अपने प्रभाव वाली दो सीटों पर कांग्रेस से हार का सामना करना पड़ा था। जुलाई में उत्तराखंड में विधानसभा उपचुनाव में भाजपा को सभी तीन सीटों पर कांग्रेस के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा था। 

बहरहाल, मंगलवार को घोषित उपचुनाव नतीजों में उत्तर प्रदेश में सपा ने बिजनौर, ठाकुरद्वारा, निघासन, हमीरपुर, चरखारी, सिरुथा, बलहा और रोहनिया सीटों पर जीत दर्ज की। जबकि भाजपा ने सहारनपुर (शहर), लखनऊ पूर्व और नोएडा सीट जीती। चरखारी सीट पहले केंद्रीय मंत्री उमा भारती के पास और लखनऊ पूर्व सीट केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के पास थी। गुजरात में भाजपा को देसा, मंगरोल और खम्बालिया सीटों पर कांग्रेस से पराजय का सामना करना पड़ा। जबकि उसने मणिनगर, तंकारा, तेलजा, आणंद, खेड़ा और लिमखेडा विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की। 

राजस्थान में भाजपा को नसीराबाद, वैर और सूरजगढ़ सीट पर हार का सामना करना पड़ा जबकि कोटा सीट पर पार्टी ने कब्जा बनाए रखा। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने प्रतिष्ठित चौरंगी सीट पर जीत दर्ज की और तृणमूल उम्मीदवार नयन बंद्योपाध्याय ने भाजपा के ऋतेश तिवारी को 14344 वोट से पराजित किया। 

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