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मनमानी के विरुद्ध PDF Print E-mail
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Tuesday, 16 September 2014 11:35

जनसत्ता 16 सितंबर, 2014: यातायात-नियमों की अनदेखी पर जुर्माने के प्रावधान का अपेक्षित असर नजर नहीं आता। इसके मद्देनजर समय-समय पर जुर्माने की रकम बढ़ाई गई और कारावास की सजा आदि के कड़े नियम बनाए गए, पर उसका भी कोई खास नतीजा आ पाया। सड़क दुर्घटनाओं में लोगों के मारे जाने के आंकड़े हर साल कुछ बढ़े हुए नजर आते हैं। इस मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है। हमारे यहां सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की सबसे बड़ी वजह लोगों का यातायात-सुरक्षा के नियमों का पालन न करना है। बहुत सारे लोग इन नियमों को तोड़ना जैसे अपनी शान समझते हैं। फिर लाल बत्ती पार कर जाने, गाड़ी चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करने, हेलमेट न पहनने, नशे में या तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने, तय संख्या से अधिक लोगों को बिठाने, बगैर लाइसेंस या पंजीकरण के वाहन चलाने आदि पर जुर्माने की रकम इतनी कम है कि बहुत-से इसकी परवाह नहीं करते और जुर्माना चुका कर अपनी पुरानी आदतें जारी रखते हैं। इसलिए कुछ साल पहले नियम बना कि यातायात-नियमों के उल्लंघन पर वाहन चालक के लाइसेंस को मशीन में डाल कर चिह्नित किया जाएगा। तीन बार से अधिक उल्लंघन करने पर लाइसेंस रद््द कर दिया जाएगा। पर इसका भी बहुत असर नहीं दिखाई दे रहा। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने सड़क यातायात एवं सुरक्षा विधेयक में संशोधन का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित कानून के मुताबिक यातायात-नियमों के गंभीर उल्लंघन पर चालक को महज जुर्माना अदा करने और कुछ समय जेल में गुजारने से मुक्ति नहीं मिल सकेगी, बल्कि उसका लाइसेंस पांच साल तक के लिए रद्द किया जा सकता है।

प्रस्तावित कानून के तहत यातायात-नियमों के उल्लंघन का ब्योरा केंद्रीय स्तर पर दर्ज किया जा सकेगा। वाहन चालक के लाइसेंस को मशीन में चिह्नित किया जाएगा। हर गलती पर एक से लेकर चार अंक तक जुड़ते जाएंगे और बारह अंक होते ही लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। पर समस्या यह है कि इस नियम


के तहत उन्हीं लाइसेंसों को चिह्नित किया जा सकेगा, जो इलेक्ट्रॉनिक तकनीक से बनाए गए हैं। यह तकनीक पूरे देश में तो दूर, दिल्ली में ही ठीक से काम नहीं कर पा रही है। बहुत सारे राज्यों में अब भी कागज वाले लाइसेंस चलन में हैं। जो लोग दूसरे राज्यों से ऐसा लाइसेंस बनवा कर दिल्ली आते और वाहन चलाते हैं, उनके लाइसेंस को चिह्नित करना कैसे संभव होगा? फिर बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि खुद यातायात पुलिस प्रस्तावित कानूनों के अमल में कितनी संजीदगी दिखाती है। यातायात नियमों के उल्लंघन की प्रवृत्ति बढ़ती जाने के पीछे काफी हद तक यातायात पुलिस की लापरवाही भी रही है। ज्यादातर मामलों में उचित कार्रवाई के बजाय कुछ ले-देकर मामले को रफा-दफा करने का चलन-सा बनता गया है। इसलिए भी लोगों में नियम-कायदों की अनदेखी की फितरत पनपी है। तय सीमा से अधिक बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद््द करने का प्रावधान पहले से लागू है, मगर उसके अपेक्षित नतीजे नहीं आ पाए हैं। पहले पूरे देश में यातायात और सुरक्षा संबंधी स्थितियों पर विचार करते हुए इस महकमे से जुड़े लोगों को और जवाबदेह बनाना होगा, तभी सड़कों पर अनुशासन और बेहतर सुरक्षा का भरोसा पैदा किया जा सकेगा।  


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