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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण से पूछा: 'रजिस्टर किसने दिया' PDF Print E-mail
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Tuesday, 16 September 2014 08:23



 जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को सीबीआइ निदेशक रंजीत सिन्हा के निवास पर रखे आगंतुक रजिस्टर का ब्योरा देने वाले विसल ब्लोअर का नाम बताने को कहा है। भूषण ने अदालत में आरोप लगाया था कि जांच ब्यूरो के निदेशक 2जी मामले के आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। 

शीर्ष अदालत ने सोमवार को कहा कि रंजीत सिन्हा के निवास के आगंतुक रजिस्टर सहित तमाम दस्तावेज लीक करने वाले व्हिसिल ब्लोअर का नाम जानने के बाद ही जांच ब्यूरो के निदेशक पर लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर विचार किया जाएगा। जज एचएल दत्तू और जज एसए बोबडे की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में भूषण की ओर से दायर हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुरूप नहीं है। अदालत ने भूषण को उस स्रोत का नाम बताने का निर्देश दिया जिससे उन्हें ये सभी दस्तावेज मिले हैं। जजों ने भूषण से कहा कि विसल ब्लोअर का नाम सीलबंद लिफाफे में दिया जाए। एक बार जब हम महसूस करेंगे कि इसमें कुछ छल कपट है तभी हम विचार करेंगे कि इसमें किस तरह की जांच की जरूरत है। 

वहीं भूषण ने विसल ब्लोअर का नाम बताने के सुझाव का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कहा कि पेश किए गए सभी दस्तावेज सही हैं। शीर्ष अदालत खुद इनकी सत्यता की जांच कर सकता है या फिर इसकी सत्यता का पता लगाने के लिए कोई समिति या विशेष जांच दल गठित कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह रजिस्टर असली होने के मसले को लेकर मैं अपनी जान जोखिम में डाल सकता हूं। फर्जी दस्तावेज तैयार करना असंभव है। मैं गारंटी दे सकता हूं कि रजिस्टर वास्तविक है, जो प्रवेश द्वार पर था। यह स्पष्ट है कि 2जी प्रकरण में अभियोजन मामले को निदेशक बरबाद कर रहे हैं। इसके बाजवूद, अदालत ने भूषण से अनुरोध किया कि विसल ब्लोअर का नाम सीलबंद लिफाफे में दिया जाए।

निदेशक ने शीर्ष अदालत में इस डायरी के अस्तित्व पर ही सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इसमें 90 फीसद प्रविष्टियां फर्जी हैं। लेकिन कुछ प्रविष्टियां सही हो सकती हैं। रंजीत सिन्हा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि मामले में कार्यवाही को कोई दूसरा ही नियंत्रित कर रहा है। उन्होंने सवाल किया कि एक मीडिया समूह पहले से ही यह खबर कैसे प्रकाशित कर सकता है कि भूषण शीर्ष अदालत में आगंतुकों की


मूल सूची जमा करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विवाद के पीछे एक कारपोरेट घराना काम कर रहा है। इसका मकसद 2जी प्रकरण में कुछ आरोपियों को लाभ पहुंचाना है। 

शीर्ष अदालत इस विवाद पर सीबीआइ का दृष्टिकोण भी जानना चाहती थी। लेकिन जांच एजंसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ने इस विवाद में पड़ने से इनकार करते हुए कहा कि यह वकील प्रशांत भूषण और निदेशक के बीच का मामला है। वेणुगोपाल ने कहा कि वह सीबीआइ का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वो ऐसा कुछ नहीं कह सकते जो एजंसी के मुखिया के खिलाफ हो। उन्होंने अदालत को सूचित किया कि इस मामले में सिन्हा ने उनसे संपर्क किया था। लेकिन उन्होंने उन्हें अपने बचाव के लिए किसी स्वतंत्र वकील की सेवाएं लेने का सुझाव दिया। 

अदालत ने आदेश पारित करने से पहले अदालत के सलाहकार के रूप में वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का पक्ष भी सुना। हालांकि वो 2जी मामले में एक आरोपी की ओर से अदालत में मौजूद थे। जेठमलानी ने भूषण की ओर से पेश जानकारी का जिक्र करते हुए कहा कि सुनी-सुनाई बातों के आधार पर दायर हलफनामा सीमित तौर पर उपयोगी ही होगा। 

शीर्ष अदालत ने एक घंटे से भी अधिक समय तक इस मामले की सुनवाई के बाद इसे 22 सितंबर के लिए स्थगित कर दिया। अदालत ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि निदेशक की ओर से दाखिल सारे दस्तावेज और हलफनामे सीलबंद लिफाफे में सेक्रेटरी जनरल के पास सुरक्षित रखवा दिए जाएं। जेठमलानी ने कहा कि सीबीआइ निदेशक के बारे में भूषण की ओर से पेश सारे दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।

सीबीआइ, सिन्हा और भूषण ने इस अनुरोध का विरोध किया लेकिन अदालत ने जेठमलानी के कथन पर हलफनामे के रूप में उनका जवाब मांगा और इस विषय को 24 सितंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया। 

सोमवार को मामले की सुनवाई शुरू  होते ही जांच एजंसी के निदेशक के वकील ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया। इसमें एक दिन पहले ही शीर्ष अदालत में भूषण की ओर से दाखिल किए जाने वाले मूल रजिस्टर का जिक्र था। अदालत ने भूषण से जानना चाहा कि एक दिन पहले ही मीडिया को इसकी जानकारी कैसे मिली। भूषण ने कहा कि मीडिया के एक वर्ग के पास इस डायरी के अंश थे और मीडिया उनके नियंत्रण में नहीं है।

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