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किसका विकास PDF Print E-mail
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Monday, 15 September 2014 12:08

जनसत्ता 15 सितंबर, 2014: मौजूदा विकास नीति पूंजीवादी व्यवस्था को मजबूत कर रही है। धरती को खोखला करके हो रही प्राकृतिक संसाधनों की लूट को विकास बता कर जन-साधारण को छला जा रहा है। विकास के नाम पर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जीवन मूल्यों का संकट गहरा रहा है। आम आदमी को विकास की अंधी दौड़ में फंसाए जाने से समस्याएं विकराल रूप धारण कर ली हैं। मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सरकार की नीयत और नीति में खोट होने से जनविरोधी कामों को बढ़ावा मिल रहा है। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने विकास मरीचिका का भ्रमजाल फैला कर पूरे प्रदेश को बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े घरानों के शिकंजे में कस दिया है। प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय चारागाह बनाने का दुश्चक्र काफी खतरनाक साबित होगा! 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘निवेशक सम्मेलन’ आयोजन के माध्यम से विदेशी कंपनियों और बड़े घरानों को खुला आमंत्रण देकर उन्हें भारी लाभ पहुंचाने के लिए प्रदेश की अस्मिता के साथ क्रूर खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रदेश का आम आदमी महंगाई, भ्रष्टाचार, गैर-बराबरी, लूट-खसोट


और आतंक के राज में जीने को विवश है। उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं है। जबरा मारे और रोने न दे की कहावत चरितार्थ हो रही है। कुटीर उद्योगों की भारी अनदेखी हो रही है। बाहर से बड़े पूंजीपति आकर रीवा को लूटने में लगे हुए हैं। 

अजय खरे, रीवा


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