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जेएनयू छात्र संघ पर आइसा का कब्जा PDF Print E-mail
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Monday, 15 September 2014 09:43


 जनसत्ता संवाददाता

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के चुनाव में एक बार फिर आल इंडिया स्टूडेंट्स ऐसोसिएशन (आइसा) ने कब्जा जमाया है। अध्यक्ष सहित केंद्रीय पैनल के सभी चार पदों पर आइसा ने जीत दर्ज की है। बीते साल आइसा की ओर से जीते अध्यक्ष अकबर चौधरी और संयुक्त सचिव सरफराज हामिद पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों के बावजूद छात्रों ने आइसा उम्मीदवारों को तरजीह दी। हालांकि इस चुनाव में लेफ्ट प्रोग्रेसिव फ्रंट (एलपीएफ) ने बेहतर प्रदर्शन कर आइसा को कड़ी टक्कर दी। 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय के 31 स्कूलों के पार्षद पदों में से 12 पर जीत दर्ज की। इसके अलावा केंद्रीय पैनल में उपाध्यक्ष और महासचिव पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहे। शुक्रवार रात से जारी मतगणना रविवार सुबह करीब तीन बजे खत्म हुई। मतों की गिनती के बाद चुनाव समिति के अध्यक्ष दिलीप कुमार मौर्य ने रविवार दोपहर करीब 12 बजे नतीजों की औपचारिक घोषणा की। 

इस बार हुए जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद पर आइसा उम्मीदवार आशुतोष कुमार ने वामपंथी गठबंधन की राहिला प्रवीन को 377 वोटों से हराया। आशुतोष को 1386 और राहिला को 1009 वोट मिले। उपाध्यक्ष पद पर आइसा उम्मीदवार अनंत प्रकाश


नारायण ने 1366 मत पाकर जीत दर्ज की। एबीवीपी के जाहिदुल दीवान 756 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। उपाध्यक्ष पद पर एनएसयूआइ के उम्मीदवार हिना गोस्वामी को 711 मत मिले और वो तीसरे स्थान पर रहीं। महासचिव पद पर आइसा उम्मीदवार चिंटू कुमारी को 1605 वोट मिले। उन्होंने एबीवीपी के आशीष कुमार धनौटिया को 814 वोटों से हराया। आशीष को 791 वोट मिले। संयुक्त सचिव पद पर आइसा के नैयर जुलकुरनैन को 1209 मत मिले। उन्होंने वामपंथी प्रगतिशील गठबंधन के उम्मीदवार मुलायम सिंह को 240 वोट से हराया। मुलायम सिंह को कुल 969 वोट मिले। 

अध्यक्ष और संयुक्त सचिव पद पर लेफ्ट प्रोग्रेसिव फं्रट तो उपाध्यक्ष और महासचिव पद पर एबीवीपी ने आइसा को कड़ी टक्कर दी। आमतौर से परिषद और एनएसयूआइ तीसरे या चौथे पायदान पर रहती हैं। पिछले चुनावों में दूसरे या तीसरे नंबर पर रहने वाली एसएफआइ इस बार और नीचे खिसक गई। इस बार के चुनाव में यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद आइसा के पदाधिकारियों के इस्तीफे असर डाला और छात्रों ने एक बार फिर इस वामपंथी संगठन पर विश्वास जताया। 

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