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राजग सरकार ने राज्यपालों का किया अपमान: शीला दीक्षित PDF Print E-mail
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Monday, 15 September 2014 08:38



जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। यूपीए के शासनकाल में नियुक्त किए गए राज्यपालों को पद छोड़ने पर मजबूर करने के लिए राजग सरकार पर हमला बोलते हुए केरल की पूर्व राज्यपाल और दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित ने रविवार को कहा कि नई सरकार ने चुनिंदा तरीके से संवैधानिक पद पर बैठे लोगों को निशाना बनाया और उन्हें अपमानित किया जो लोकतंत्र में सहीं नहीं लगता। 

76 वर्षीय शीला को लोकसभा चुनावों की आचार संहिता लागू होने से कुछ दिन पहले ही मार्च में यूपीए सरकार ने केरल का राज्यपाल नियुक्त किया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें फोन कर इस्तीफा देने के लिए कहा था। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि राज्यपालों को सम्मान के साथ देखा जाना चाहिए। यह बहुत गरिमामयी और संवैधानिक पद है। उन्होंने चुनिंदा तरीके से राज्यपालों को निशाना बनाया। यह इस संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के लिए अपमान की बात है जो लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। शीला ने कहा- मैं अपने बारे में नहीं सोच रही। मैं केवल संवैधानिक पदों की प्रतिष्ठा को लेकर चिंतित थी। अगर केंद्र में नई सरकार बनने पर राज्यपालों को पद छोड़ना होगा तो एक नया कानून बनना


चाहिए। संसद को एक कानून पारित करना चाहिए जिसमें नई सरकार के बनने पर राज्यपालों के इस्तीफे का प्रावधान हो।

राजग सरकार की आलोचना करते हुए शीला ने कहा कि कमला बेनीवाल को गुजरात से मिजोरम का राज्यपाल बनाना और फिर उन्हें हटा देना राजग सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद के लिए पूरी तरह असम्मान दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर (राज्यों) में नियुक्ति को सजा के तौर पर क्यों देखा जाता है। जब शीला दीक्षित से पूछा गया कि क्या केरल के राज्यपाल के पद से इस्तीफा नहीं देने की स्थिति में उन्हें किसी तरह के स्थानांतरण का संकेत दिया गया था तो उन्होंने नहीं में जवाब दिया। उन्होंने 25 अगस्त को केरल के राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया था। 26 मई को मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से इस्तीफा देने वाली वह आठवीं राज्यपाल थीं।

इससे पहले के शंकरनारायण (महाराष्ट्र), एमके नारायणन (पश्चिम बंगाल), अश्विनी कुमार (नगालैंड), बीएल जोशी (उत्तर प्रदेश), बीवी वांचू (गोवा) और शेखर दत्त (छत्तीसगढ़) इस्तीफा दे चुके थे। मिजोरम के राज्यपाल वी पुरुषोत्तम ने जुलाई में नगालैंड भेजे जाने के आदेश के बाद इस्तीफा दिया था।


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