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सोनिया गांधी और अमित शाह से सूचना आयोग ने मांगा जवाब PDF Print E-mail
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Monday, 15 September 2014 08:26



जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ चार अन्य राजनीतिक दलों के प्रमुखों को कारण बताओ नोटिस भेजकर पूछा है कि आरटीआइ कानून के तहत आयोग के आदेश का पालन नहीं करने के मामले में क्यों न जांच शुरू  की जाए। 

पिछले साल आरटीआइ कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल की याचिका पर सीआइसी ने छह राष्ट्रीय दलों- कांग्रेस, भाजपा, राकांपा, भाकपा, माकपा और बसपा को सार्वजनिक प्राधिकार घोषित किया था और इस नाते इन्हें सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाया गया था। पर इनमें से किसी भी दल ने न तो फैसले को अदालतों में चुनौती दी है और न ही आयोग के निर्देशों का पालन किया है। आयोग ने गत 7 फरवरी और 25 मार्च को नोटिस भेजकर इन राजनीतिक दलों से अग्रवाल की इस शिकायत पर उनके विस्तृत स्पष्टीकरण मांगे थे कि उन्होंने सीआइसी के आदेशों का पालन नहीं किया है। चार हफ्ते में इस बारे में कारण बताने के लिए नोटिस जारी किया गया है


कि आरटीआइ कानून 2005 की धारा 18 के तहत 3 जून 2013 के आयोग के आदेश का पालन नहीं होने के मामले में जांच क्यों नहीं शुरू  की जाए। नोटिस में कहा गया है कि अगर निर्दिष्ट समय में ये दल जवाब नहीं दे सके तो आॅन रिकॉर्ड उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले को कानून के मुताबिक आगे बढ़ाया जाएगा।

कांग्रेस, भाजपा, बसपा और राकांपा के अध्यक्षों और भाकपा व माकपा के महासचिवों को भी नोटिस भेजे गए हैं। यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के कुछ दिन बाद आया है जिसमें आयोग को निर्देश दिया गया है कि आरटीआइ कानून के तहत जवाबदेह होने के सीआइसी के निर्देश का पालन नहीं होने के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ एक शिकायत पर छह महीने में फैसला किया जाए। आरटीआइ कानून के तहत सूचना देने से इनकार करना या पूरी जानकारी नहीं देना अपराध माना जाता है  


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