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दोस्त-दोस्त ना रहा: मुख्यमंत्री पद को लेकर भाजपा-शिवसेना में बढ़ी तकरार PDF Print E-mail
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Monday, 15 September 2014 08:18


 मुंबई/पुणे। आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए सीटों की साझेदारी लेकर शिवसेना-भाजपा गठबंधन में तनाव रविवार को और गहरा गया। भाजपा ने पलटवार करते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के इस बयान को खारिज कर दिया कि गठबंधन की जीत की स्थिति में मुख्यमंत्री पद शिवसेना के पास जाएगा और वे यह पद ग्रहण करने के खिलाफ नहीं हैं। भाजपा की शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के शनिवार के उस सार्वजनिक बयान से त्चोरियां चढ़ गईं जिसमें उन्होंने कहा था कि 15 अक्तूबर को होने वाले चुनाव में यदि भाजपा-शिवसेना गठबंधन सत्ता में आया तो महाराष्ट्र में शिवसेना का ही मुख्यमंत्री बनेगा।


उद्धव ने कहा था कि यह लोगों को तय करना है कि क्या वे मुझ पर भरोसा करते हैं। वे तय करेंगे कि मुख्यमंत्री कौन हो। मैं किसी पद के लिए नहीं भाग रहा लेकिन मैं जिम्मेदारी से भी नहीं बचूंगा। लेकिन चेहरा केवल शिवसेना से ही होगा। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय के माध्यम से भी भाजपा पर प्रहार किया है। लोकसभा चुनाव में मिली भारी जीत के बाद भाजपा महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटों की मांग पर अड़ी है।

सामना के संपादकीय में कहा गया कि अत्यधिक लालच से तलाक हो जाता है। गठबंधन के सहयोगियों को जीत का स्वप्न देखना चाहिए। लेकिन इसके लिए सभी पार्टियों को ज्यादा सीटों का लालच छोड़ देना चाहिए।

उद्धव के बयान को दोहराते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी कहा कि अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से ही होगा। राउत ने मुंबई में कहा कि दो-तीन दिन में सभी को यह स्पष्ट हो जाएगा कि शिवसेना-भाजपा गठबंधन, जो पिछले कई साल से मजबूत होता जा रहा है, इस बार भी मजबूत रहेगा। राज्य का मुख्यमंत्री कौन होगा, यह शिवसेना तय करेगी। अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से ही होगा।

इस मुद्दे पर शिवसेना के आक्रामक रवैये से हैरत में आई भाजपा ने भी पलटवार करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में जीत होने की स्थिति में अगली सरकार भाजपा के नेतृत्व


में बनेगी। पार्टी प्रवक्ता माधव भंडारी ने कहा कि दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत चल रही है। बहरहाल, अभी उनके बीच गतिरोध आ गया है। लेकिन उन्होंने भी दोहराया कि महाराष्ट्र में अगली सरकार भाजपा के नेतृत्व में बनेगी। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष (अमित शाह) ने अपनी मुंबई यात्रा के दौरान इस बात को स्पष्ट कर दिया था और उनका निर्णय अंतिम है। 

उद्धव के बयान और शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय पर नाखुशी जाहिर करते हुए महाराष्ट्र के पार्टी मामलों के प्रभारी भाजपा नेता राजीव प्रताप रूड़ी ने पुणे में कहा कि ऐसे बयानों से परहेज करने की जरूरत है। चुनाव के बाद इस मुद्दे (मुख्यमंत्री के चयन) पर फैसला होगा।

रूड़ी ने कहा कि भाजपा, शिवसेना से परिपक्व और सम्मानजनक समझदारी की उम्मीद करती है। हमने प्रस्ताव रखा है कि आरपीआइ (अठावले) और राजू शेट्टी की स्वाभिमान पार्टी जैसे छोटे दलों को संबंधित हिस्सा देने के बाद बाकी सीटें भाजपा व शिवसेना में बराबर-बराबर बांट दी जाए। उन्होंने कहा-इसके आधार पर हम 135 सीटों पर लड़ने की उम्मीद करते हैं और शिवसेना के लिए भी उतनी ही सीटें होंगी। 

महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा के लिए पिछले दो चुनावों में शिवसेना और भाजपा ने क्रम से 169 और 119 सीटों पर चुनाव लड़ा था। राज्य में हाल में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 48 सीटों में से 23 सीटें जीती थीं जबकि शिवसेना को 18 सीटें मिली थीं। विधानसभा चुनाव में अभी तक सीटों के बंटवारे के फार्मूला के अनुसार शिवसेना को 169 सीटें और भाजपा को 119 सीटें मिलती थीं। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में अपने अच्छे प्रदर्शन के आधार पर भाजपा कम से कम 15 और सीटें चाह रही है जबकि शिवसेना संभवत: पुराने फार्मूले पर ही अड़ी है।

(भाषा)

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