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जम्मू-कश्मीर: बाढ़ के बाद अब बीमारियों से बचने की चुनौती PDF Print E-mail
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Monday, 15 September 2014 08:07


श्रीनगर। विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहे जम्मू कश्मीर में जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका के मद्देनजर सरकार ने युद्धस्तर पर प्रयास शुरू कर दिया है। चिकित्सा कर्मी लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने जुट गए हैं। घाटी में रविवार को वर्षा होने से राहत अभियान थोड़ा प्रभावित हुआ। राहत अभियान के 13वें दिन सशस्त्र बल और आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने बाढ़ में फंसे दो लाख से ज्यादा लोगों को बचा लिया है। मौत और तबाही लाने वाली इस त्रासद बाढ़ में अभी भी एक लाख से ज्यादा लोग बेबस, असहाय बने हुए हैं। बाढ़ में कम से कम 250 लोगों की मौत हुई है। 


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने यहां आयोजित एक बैठक में मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्ला और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ स्वास्थ्य संबंधी राहत कदमों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित महामारी से निपटने के लिए राज्य प्रशासन को सभी मदद मुहैया कराई जाएगी।

हालांकि बाढ़ का पानी कम हो गया है लेकिन पूरी घाटी में पशुओं के कंकाल सहित गाद जमा हो गई है। स्वच्छ पेयजल की कमी के कारण स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। विभाग ने परामर्श जारी किया है और चिकित्सक, चिकित्साकर्मी और दवाएं रवाना की गई हैं। स्वास्थ्यकर्मी खसरे के खिलाफ व्यापक टीकाकरण अभियान चला रहे हैं। केंद्र ने और सहायता रवाना करने की बात कही है।

घाटी के कई हिस्सों में सुबह हल्की बारिश से हवाई अभियान कुछ घंटे के लिए रुक गया। वायुसेना के हेलिकॉप्टरों को कुछ क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के दौरान पथराव की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। एक हेलिकॉप्टर को पत्थर लगने के बाद वायुसेना ने अपनी रणनीति बदल दी है और उसके हेलिकॉप्टर अभियान के दौरान जमीन से सुरक्षित दूरी बनाए रख रहे हैं। एअर वाइस मार्शल उपकरजीत सिंह ने कहा- हम समझते हैं कि लोग गुस्से में हैं। कभी-कभी एक परिवार में भी बच्चे नाराज हो जाते हैं लेकिन हम तब भी मदद करते हैं।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जम्मू से सशस्त्र पुलिस की दो बटालियनें हवाई मार्ग से पहुंचाई गई हैं। पुलिस विभाग ने श्रीनगर शहर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अपनी संचार प्रणाली बहाल कर ली है।  

मुख्यमंत्री ने कहा है कि कश्मीर मंडल में 60 फीसद और जम्मू क्षेत्र में 85 फीसद बिजली आपूर्ति बहाल कर ली गई है। उन्होंने साथ ही संबंधित विभागों को घाटी में आपूर्ति किए जाने वाले राशन को दोगुना करने का भी निर्देश दिया है। मुख्य सचिव एमआइ खांडे ने राज्य सरकार के कर्मचारियों से कहा है कि वे जल्द से जल्द ड्यूटी पर आएं और सेवाएं बहाल करने में मदद करें। रेडियो कश्मीर पर प्रसारित संदेश में वाचक ने कहा- यदि आप इस अपील पर ध्यान नहीं देते हैं तो कृपया अपनी अंतरात्मा की सुनें।

जम्मू और कश्मीर क्षेत्र में 21 लाख उपभोक्ताओं वाली निजी


दूरसंचार कंपनी एअरसेल ने कहा कि उसने घाटी के अधिकतर क्षेत्रों में अपनी 2जी सेवाएं बहाल कर दी है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि एअरसेल की 2जी सेवाएं अंनतनाग, शोपियां, बांदीपुरा, कुलगाम, पुलवामा, श्रीनगर, बड़गाम, बोनीगाम और गंदेरबल में संचालित हैं। एअरसेल की 3जी सेवा भी बहाल हो गई है।

हालांकि खाने-पीने की चीजों की किल्लत बनी हुई है और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। कश्मीर घाटी में मुर्गे के मांस और प्याज के दाम एक जैसे हो गए हैं क्योंकि बाढ़ की वजह से सैकड़ों शादियां रद्द हो जाने से पशुधन की मांग बेहद कम हो गई है और सब्जियों की कीमतें आसमान छूने लगी हैं।

श्रीनगर के सौरा इलाके में मुर्गे का मांस 50 रुपए किलो बिक रहा है। यहां बाढ़ का असर नहीं हुआ है और शहर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से भागकर हजारों लोगों ने वहां शरण ले रखी है।

कश्मीर घाटी में सितंबर और अक्तूबर में खूब शादियां होती हैं। ऐसे में उनके रद्द होने का तात्पर्य है कि मांस का धंधा करने वालों को अपने बकरों और मुर्गों को बाढ़ से बचाने के लिए मेहनत करनी पड़ रही है और उन्हें उनके चारे पर काफी खर्च करना पड़ रहा है। मुर्गा विक्रेता अब्दुल रहमान ने कहा कि हम मांग में कमी के चलते लागत मूल्य से कम कीमत पर बेच रहे हैं। इससे हमें कुछ पैसे मिल जाएंगे और लोगों को भी खाने की कमी से उबरने में मदद मिलेगी।  

उद्योग मंडल एसोचैम के अनुमान के मुताबिक जम्मू कश्मीर में भीषण बाढ़ में राज्य की अर्थव्यवस्था कोे 5400-5700 करोड़ रुपए का तत्काल नुकसान हुआ है। इससे व्यापार, होटल, रेस्त्रां, बागवानी और हस्तशिल्प को भारी नुकसान हुआ है। राज्य में व्यापक पुनर्निर्माण प्रयास जारी हैं जिसकी शुरुआत स्वास्थ्य आपातस्थिति रोकने के कदम से की गई है। 

स्वास्थ्य सेवा निदेशक सलीम उर रहमान ने कहा कि हमारा मुख्य ध्यान दवा और पानी साफ करने वाली गोलियां वितरित करने पर है और क्लोरीन की लाखों गोलियां वितरित की गई हैं। हमने नगर निकायों को सफाई व्यवस्था सक्रिय करने को कहा है। हमारी प्राथमिक चिंता राहत व खाद्य सामग्री मुहैया कराने और बीमारी और महामारी रोकने पर है।

पिछले दो हफ्ते से नगर निकायों के लगभग निष्क्रिय रहने के कारण बाढ़ प्रभावित लोगों ने घाटी में कूड़ा जलाना शुरू कर दिया है। बघत निवासी बशीर अहमद खान ने कहा कि हमें नहीं पता कि सरकारी और अन्य संबंधित एजंसियों को हरकत में आने में कितना समय लगेगा। बाढ़ से प्रभावित नहीं होने वाले क्षेत्रों में भी कूड़ा जमा होने से महामारी फैलने की आशंका उत्पन्न हो गई है। इसी तरह से शहर के बाहरी इलाकों जैसे रावलपोरा, रंगरेत और हैदरपुरा में ऐसे ही प्रयास जारी हैं।

(भाषा)


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