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सुषमा स्वराज ने अपने रूसी समकक्ष से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर की चर्चा PDF Print E-mail
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Friday, 12 September 2014 15:27


दुशांबे (ताजिकिस्तान)। भारत और रूस ने आज रक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और निवेश समेत द्विपक्षीय संबंधों के सभी आयामों की समीक्षा की और सामरिक एवं अन्य संबंधों को नई गति प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की। 


    एससीओ के वार्षिक शिखर सम्मेलन से इतर हुई एक बैठक में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव ने उक्रेन, इराक और अफगानिस्तान की स्थिति और इस वर्ष बाद में होने वाली रूसी राष्ट्रपति ब्लादीमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा पर विस्तृत चर्चा की ।

    विभिन्न संयुक्त परियोजनाओं पर अमल करने के अलावा आर्थिक सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के बारे में सुषमा और लावरोव ने व्यापक चर्चा की और उम्मीद व्यक्त की कि भारत की नयी सरकार इन संबंधों को और आगे बढ़ाएगी। 

    दोनों नेताओं ने महसूस किया कि व्यापार, ऊर्जा, निवेश और रक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच संबंधों को और आगे बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। 

    यूक्रेन में अलगाववादियों का समर्थन करने के कारण लगे प्रतिबंध के मद्देनजर रूस अपने संबंधों को भारत और चीन जैसे देशों के साथ और बढ़ाना चाहेगा। 

     बहरहाल, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कल कहा था के अमेरिका और यूरोपीय संघ ने रूस पर रक्षा, वित्त और ऊर्जा क्षेत्र में समन्वित प्रतिबंध को और बढाने का निर्णय किया है जो यूक्रेन में अवैध कार्रवाई के खिलाफ है। 

     सूत्रों ने कहा, ‘‘ बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयामों पर चर्चा की गई। इसके अलावा इराक, अफगानिस्तान और यूक्रेन की स्थिति पर भी दोनों नेताओं ने चर्चा की।’’ 

     सुषमा और


लावरोव ने इस वर्ष बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच निर्धारित वार्षिक शिखर वार्ता की तैयारियों के बारे में चर्चा की। इस बैठक में दोनों पक्ष सामरिक संबंधों को और व्यापक रूप देने की घोषणा कर सकते हैं। 

     भारत की विदेश नीति में रूस के साथ संबंध एक मजबूत स्तम्भ है। प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति के बीच वार्षिक शिखर बैठक दोनों देशों के बीच सामरिक गठजोड़ के लिए सर्वोच्च संस्थागत वार्ता तंत्र है। 

     अब तक भारत और रूस के बीच 14 वार्षिक सामरिक शिखर वार्ता हो चुकी है। पिछली शिखर वार्ता 21 अक्तूबर 2013 को हुई थी। 


    भारत का रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में दीर्घावधि औरर व्यापक सहयोग है। भारत और रूस का सैन्य तकनीकी सहयोग सामान्य खरीदार से आगे बढ़ते हुए अब संयुक्त अनुसंधान, विकास और उत्पादन के स्तर तक पहुंच गया है। 

    दोनों नेताओं ने बैठक के दौरान अफगानिस्तान की स्थिति के बारे में चर्चा की क्योंकि नाटो सैनिक इस वर्ष के अंत तक इस देश को छोड़ देंगे। 

    रूस भारत की परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में मदद कर रहा है और उसने भारत के परमाणु दायित्व कानून पर सिद्धांत रूप में सहमति व्यक्त की है जिसने कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र (केएनपीपी) की इकाई 3 और 4 के अनुबंध पर हस्ताक्षर का मार्ग प्रशस्त किया। 

    केएनपीपी की दो इकाइयां तमिलनाडु में रूस के सहयोग से स्थापित की गई हैं और इसमें से पहली इकाई परिचालन में आ चुकी है। 

(भाषा) 


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