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कश्मीर की मदद के लिए हर तरफ से बढ़े हाथ PDF Print E-mail
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Friday, 12 September 2014 09:43



जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। कश्मीर में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद युद्धस्तर पर प्रभावित लोगों को राहत देने की कार्रवाई शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने जम्मू कश्मीर के बाढ़ प्रभावितों की सहायता के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में अपने एक दिन का वेतन दिया है। गृह सचिव हालात का जायजा लेने के लिए श्रीनगर गए हैं। रेलवे ने राहत सामग्री मुफ्त ले जाने का एलान किया है जबकि विमानन कंपनियां वहां फंसे लोगों को राजधानी लाने में जुटी हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय के एक बयान में यह जानकारी देते हुए बताया गया कि पीएमओ के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी इच्छा से जम्मू व कश्मीर के बाढ़ पीड़ितों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए यह पहल की है। मालूम हो कि बुधवार को प्रधानमंत्री ने  अधिकारियों को निर्देश दिया था कि जम्मू कश्मीर में भयावह बाढ़ के बाद बचाव और राहत अभियान तेज करने में राज्य सरकार को पूरा सहयोग दें। उन्होंने प्रभावित लोगों तक जरूरी वस्तुएं तेजी से पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। 

राज्य में राहत अभियानों की समीक्षा के लिए देर शाम आयोजित उच्च स्तरीय आपात बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भीषण आपदा में प्रभावित लोगों तक भोजन और पानी जैसी बुनियादी चीजें पहुंचाने पर तत्काल ध्यान दिया जाए। 

उन्होंने गृह मंत्रालय को भी निर्देश दिया कि श्रीनगर में स्थानीय प्रशासन के साथ राहत अभियान में मदद करने के लिए दिल्ली और दूसरे राज्यों से वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल भेजा जाए। जम्मू कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ के प्रभावितों के बचाव और राहत कार्यों में मंद गति के आरोपों के बीच केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी इन कार्यों में समन्वय बिठाने के लिए श्रीनगर रवाना हो गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए राज्य सरकार को पूर्ण समर्थन देने का निर्देश दिए जाने के दूसरे दिन गोस्वामी श्रीनगर रवाना हुए हैं। 

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि गृह सचिव के नेतृत्व में अधिकारियों का एक दल राहत और बचाव कार्यों में समन्वय लाने के लिए श्रीनगर रवाना हुआ है। जम्मू-कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले गोस्वामी कश्मीर घाटी में बाढ़ में फंसे लाखों लोगों तक बचाव और राहत कार्यों को पहुंचाने में गति लाने का प्रयास करेंगे। राज्य में आई प्रलयकारी बाढ़ में पांच से छह लाख लोगों के फंसे होने का अनुमान है और 82000 लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला जा चुका है।

इस सप्ताह दूसरी बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने जम्मू कश्मीर में बाढ़ के संकट से निपटने के मामले में अच्छा काम करने और पाक अधिकृत कश्मीर को सहायता की पेशकश करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की है। मोदी के धुर विरोधी समझे जाने वाले पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से कहा कि जम्मू कश्मीर में, केंद्र और राज्य सरकार ने अच्छा काम किया है। 

उन्होंने कहा कि पाक अधिकृत


कश्मीर को मदद की पेशकश करने के लिए भी मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करूंगा। उन्होने आठ सितंबर को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी। उस दिन उन्होंने ट्विटर पर अपनी टिप्पणी में कहा था कि जम्मू-कश्मीर में डीएमआरएफ, सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे बचाव अभियान की हम प्रशंसा करते हैं। भारत सरकार और प्रधानमंत्री की भी उनकी त्वरित कार्रवाई और लोगों तक पहुंचने के लिए सराहना करते हैं। 

कांग्रेस प्रवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा था कि एआइसीसी उन सभी लोगों की मददगार होगी जो मानवीय कार्य करने वाले हैं। खुर्शीद से पत्रकारों ने दिग्विजय सिंह और गुलाम नबी आजाद के मोदी की तारीफ किए जाने संबंधी बयान के बारे में पूछा था। बाढ़ प्रभावित जम्मू कश्मीर में बचाव अभियान को तेज करते हुए एअर इंडिया और अन्य विमानन कंपनियों ने श्रीनगर और लेह से 500 से अधिक यात्रियों को यहां पहुंचाया जिनमें करीब 200 इंजीनियरिंग के विद्यार्थी शामिल हैं। विमानों से टनों राहत सामग्री भी जम्मू कश्मीर तक पहुंचाई गई। एअर इंडिया ने अपने नियमित परिचालन के अतिरिक्त गुरुवार को दूसरे दिन लेह और श्रीनगर के लिए दो विशेष उड़ानों को भेजा। 

गो एअर ने भी लेह से दिल्ली तक एक विमान को भेजा जिसमें राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआइटी) के 151 छात्रों को निशुल्क लाया गया। वहीं एअर इंडिया ने आंध्र प्रदेश के रहने वाले एनआइटी के 44 विद्यार्थियों समेत 122 यात्रियों को दिल्ली पहुंचाया।

एअर इंडिया ने एअर बस 330 के साथ श्रीनगर तक राहत सामग्री भी भेजी। सभी विमानों में दवाओं, बोतल बंद पानी, खाद्य सामग्री और कंबल आदि राहत सामग्री बड़ी मात्रा में बिना किराए के श्रीनगर पहुंचाई जा रही है। 

बाढ़ग्रस्त राज्य से लोगों को सुरक्षित पहुंचाने के अलावा एयरलाइंस उन यात्रियों से अपनी उड़ान रद्द करने के लिए भी कोई पैसा नहीं ले रहीं जो 30 सितंबर तक श्रीनगर की अपनी यात्रा को निरस्त करना चाहते हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने विमानन कंपनियों से श्रीनगर से दिल्ली और लेह से दिल्ली के लिए अपनी सेवाओं का कुल किराया क्रमश: 2800 और 3000 रुपए तक सीमित रखने को कहा है। इसके बाद श्रीनगर से जम्मू, मुंबई, चंडीगढ़, बंगलूर और अमदाबाद समेत देश के अनेक हिस्सों में जाने वाले यात्रियों के लिए स्पाइसजेट ने विशेष किराए की पेशकश की। 

जम्मू कश्मीर में आई भयंकर बाढ़ के मद्देनजर रेलवे ने बिना किराया वसूले राहत सामग्रियों को वहां पहुंचाने और बाढ़ में फंसे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए विशेष ट्रेनों सहित कई कदम उठाने का फैसला किया है। रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जम्मू कश्मीर में बाढ़ से प्रभावित लोगों को वितरित किए जाने वाली राहत सामग्रियों में खाने-पीने की चीजें, दवा, कपड़े, बर्तन आदि शामिल है। रेल द्वारा मुफ्त परिवहन की यह सुविधा 22 सितंबर तक जारी रहेगी। 


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