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बाढ़ में बह गई थी मेरी सरकार: उमर अब्दुल्ला PDF Print E-mail
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Friday, 12 September 2014 09:10



 श्रीनगर। जम्मू कश्मीर में छह दिन पहले आई आपदा की विभीषिका को याद करते हुए जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा-मेरे पास कोई सरकार नहीं थी क्योंकि व्यवस्था का आसन एक सदी से भी अधिक समय की सबसे भीषण बाढ़ में बह गया था। उनके अपने आवास में बिजली नहीं है, उनके मोबाइल फोन में कनेक्टिविटी नहीं है। उमर एक गेस्ट हाउस से काम कर रहे हैं जहां उन्होंने एक अस्थायी मिनी सचिवालय स्थापित किया है ताकि बचाव व राहत अभियानों की निगरानी कर सकें।


राज्य के वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर गुरुवार को कराधान कार्यालय में मिले, जहां वे पिछले पांच दिनों से फंसे हुए थे। बाढ़ के कारण वे बाहर नहीं आ पा रहे थे और संचार व्यवस्था ठप हो जाने से दुनिया से संपर्क कट गया था। उमर ने कहा-मेरी राजधानी (श्रीनगर) चली गई थी। मेरी सरकार पूरी तरह जलमग्न हो गई थी। मेरे पास पहले 36 घंटों तक कोई सरकार नहीं थी। मैंने उसके बाद एक कमरे में छह अधिकारियों के साथ सरकार का काम फिर शुरू  किया। 

तबाही को याद करते हुए उमर ने कहा कि व्यवस्था बह गई थी। राज्य विधानसभा भवन, हाई कोर्ट, पुलिस मुख्यालय और अस्पताल सभी पानी में हैं। वे पहले तीन दिनों तक अपने अधिकतर मंत्रियों से संपर्क करने में असमर्थ रहे और अब भी एक-दो मंत्रियों के ठिकानों के बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके साथ ही वे अधिकतर विधायकों से भी संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। उनके करीबी सहयोगी और सत्तारूढ़ नेशनल कांफ्रेंस के कश्मीर प्रांतीय अध्यक्ष नसीर वानी मुख्यमंत्री के आवास में आ गए हैं। लेकिन वे अपने परिवार से नहीं मिल पा रहे हैं जो पास में पानी से घिरे एक होटल में फंसा हुआ है। 

वीआइपी लोगों तक मदद पहुंचाने को प्राथमिकता दिए जाने के आरोपों को खारिज करते हुए उमर ने कहा कि उनके अपने चाचा भी अपने घरों में फंसे हुए थे जिस तरह बड़ी संख्या में अन्य तथाकथित महत्त्वपूर्ण लोग फंसे हुए थे। उमर ने जोर देते हुए कहा कि हालिया याददाश्त में देश की विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में राज्य की राजधानियां प्रभावित नहीं हुर्इं थीं, चाहे गुजरात का भूकम्प हो, उत्तराखंड में अचानक आई बाढ़ या फिर ओड़िशा का चक्रवात। यह अविश्वसनीय और अकल्पनीय था। शुरू  में हर किसी का बाकी सब से पुलिस, शीर्ष अधिकारियों, मंत्रियों, विधायकों, डाक्टरों से संपर्क कट गया। उनमें से बहुत लोग जहां थे, वहीं फंस गए, बाहर नहीं निकल सकते थे। 

झेलम नदी के जलस्तर में कमी के साथ ही स्थिति में धीरे-धीरे सुधार का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ क्षेत्रों में मोबाइल फोन सेवा काम करने लगी है। राहत और बचाव कार्यों में तेजी आ रही है। बाढ़ से तबाह लोगों की नाराजगी स्वीकार


करते हुए उमर ने कहा कि भोजन की कमी और संचार व्यवस्था के ठप हो जाने से लोग परेशान थे। उस गंभीर स्थिति में सशस्त्र बल के साथ राज्य मशीनरी जो कर सकती थी, उन्होंने किया। हालांकि कुछ शरारती तत्त्व लोगों को राहत कर्मियों पर पथराव के लिए भड़का कर स्थिति का फायदा उठाने का प्रयास कर रहे थे। सिर्फ खाए-पीए लोग ही पथराव कर सकते हैं। जिन लोगों को तीन या चार दिन से खाना नहीं मिला, वे सिर्फ मदद खोजेंगे।

कश्मीर के डिवीजनल आयुक्त रोहित कंसल ने बताया कि 20 फीसद जलापूर्ति और संचार सेवाएं आंशिक तौर पर बहाल हो गई हैं। सड़कों को साफ करने के लिए प्रयास हो रहे हैं। आधे कश्मीर में जलापूर्ति काफी हद तक प्रभावित हुई है। कंसल ने कहा कि जम्मू एंड कश्मीर बैंक में खाताधारकों की सभी जमा राशि सुरक्षित है। कश्मीर के 12 जिलों में से आठ पूरी तरह से या आंशिक तौर पर प्रभावित हुए हैं। इससे 20 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। चार जिले पूरी तरह कटे हुए हैं। बाढ़ से 50 पुलों और 170 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। कम से कम 45,000 लोगों को विमान या नौकाओं के जरिए बचावकर्मियों ने निकाला है। कम से कम 5,000 लोगों को बाढ़ प्रभावित राज्य में विमानों से निकाला गया है जिसमें अधिकतर दूसरे राज्यों के हैं। प्रशासन ने 150 राहत शिविर लगाए हैं जहां एक लाख लोगों ने शरण ली है। अब तक 200 टन राहत सामग्री की आपूर्ति हुई है। श्रीनगर, एसडीएम सैयद अबीद रशीद शाह ने बताया कि पहली प्राथमिकता असहाय लोगों को बचाना है। हालात से निपटने का यह समन्वित प्रयास है जिसमें एनडीआरएफ की अहम भूमिका है। जम्मू कश्मीर के लोगों ही नहीं अस्पतालों को भी स्वच्छ पेयजल के लिए जूझना पड़ा रहा है। साथ ही बाढ़ का पानी उतरने के बाद जल जनित रोग होने की आशंका भी उत्पन्न हो गयी है। अहमद अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि हमें पानी को जबरदस्ती लाना पड़ा। हम स्थानीय जल विभाग गए। एंबुलेंस में दस लोगों को भेजा। वे गए और एक पानी टैंक को जबरन उठाकर ले आये ताकि हम अस्पताल को साफ रख सकें। चादरों को फाड़ा जा रहा है और सर्जरी के लिए संक्रमण रहित किया जा रहा है। डाक्टर तक फर्श साफ कर रहे हैं ताकि अस्पताल को स्वच्छ रखा जा सके। 

केरल में कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार ने कश्मीर में राहत सहायता के तौर पर 2 करोड़ रुपए का योगदान देने का फैसला किया है। छत्तीसढ़ सरकार ने दस करोड़ रुपए की सहायता देने की घोषणा की है। 

(भाषा)

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