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केंद्र वस्तु व सेवा कर पर व्यापक सहमति बनाने की करें कोशिश: जयललिता PDF Print E-mail
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Thursday, 11 September 2014 14:46


चेन्नई। तमिलनाडु सरकार ने कहा कि केंद्र को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े कई मामलों पर व्यापक सहमति बनाने की कोशिश करनी चाहिए और इस संबंध में राजस्व के स्थायी नुकसान से जुड़ी राज्यों की चिंता का समाधान करना चाहिए।


    यह बात मुख्यमंत्री जे जयललिता द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री अरच्च्ण जेटली को लिखे गए पत्र में कही गई। जयललिता ने जीएसटी से जुड़े कुछ ऐसे मुद्दों पर समर्थन प्राप्त करने के लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखा है जिन्हें वह महत्वपूर्ण मानती हैं।

    आज यहां जारी 10 सितंबर के इस पत्र में जयललिता ने कहा है कि इस साल जून में उन्होंने उन्हें :वित्त मंत्री को: व्यक्तिगत तौर यह पत्र सौंपा था जिसमें प्रस्तावित जीएसटी समेत तमिलनाडु से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय मुद्दों को रेखांकित किया गया था।

    उन्होंने 20 जून 2014 को जारी संविधान संशोधन विधेयक के मसौदे का जिक्र करते हुए कहा कि ‘घोषित वस्तुओं’ से जुड़े प्रावधान हटा दिए गए हैं और मानव 

उपभोग के लिए तैयार अल्कोहल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

    उन्होंने कहा ‘‘मुझे बताया गया है कि 20 अगस्त 2014 को हुई राज्य के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की हुई बैठक में कुछ और मुद्दों पर राज्यों के बीच सहमति बनी है।’’

    जयललिता ने कहा ‘‘इसमें वस्तु एवं सेवा पर जीएसटी लगाने सीमा 10 लाख रुपए (वार्षिक के कारोबार से


ऊपर) की तय की जाए, कम्पाउंडिंग योजना (एकमुश्त भुगतान के साथ निपटान) की सीमा 50 लाख रुपए तय की जानी चाहिए जिसमें न्यूनतम कर की दर 1 प्रतिशत हो और जीएसटी के तहत छूट की सूची सीजीएसटी और एसजीएसटी दोनों के लिए सामान हो। मुझे उम्मीद है कि भारत सरकार इन सभी बिंदुओं को स्वीकार कर लेगी।’’

    जयललिता ने कहा जीएसटी के अलावा पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्या के कार की दोहरी प्रणाली स्वीकार्य नहीं है।

    जयललिता ने कहा कि यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे से बारह रखने के कारण राज्यों को होने वाली राजस्वहानि की भरपाई उन्हें सेवाओं और आयातित वस्तुओं पर कर लगाने के अधिकार से हो जाएगी। 

   जयललिता का सुझाव है कि पहले तीन साल तक पेट्रोलियम उत्पादों पर जीएसटी का अंश बहुत कम या हो सके तो शून्य रखा जाए ताकि राज्यों को अचानक राजस्व का बड़ा नुकसान न हो। 

     उन्होंने जेटली को लिखा है, ‘‘ ऐसी कोई गारंटी भी नहीं दी गयी है कि पेट्रोलियम पर जीएसटी समय से पहले लागू नहीं किया जाएगा। राज्यों के संसाधन पहले से ही सीमित हैं इसलिए मैं अपील करता हूं कि पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से पूरी तरह अलग रखना चाहिए।’’  

(भाषा)



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