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कोयला से बिजली उत्पादन पिछले सौ दिनों में 22 फीसद बढ़ा: पीयूष गोयल PDF Print E-mail
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Monday, 08 September 2014 11:00


नई दिल्ली। सरकार ने रविवार को कहा कि कोयले की आपूर्ति कम नहीं है और नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार के तीन महीने के दौरान शुष्क ईंधन आधारित बिजली उत्पादन में करीब 22 फीसद की वृद्धि हुई है। यहां संवाददाताओं से बातचीत में बिजली और कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बिजलीघरों में कोयले की कमी का कारण अत्यधिक बिजली उत्पादन के लिए तेजी से भंडार का इस्तेमाल होना है। कोयले की आपूर्ति कम नहीं है। पिछले कुछ साल में कोयले की निकासी योजना के मुताबिक है। वास्तविकता यह है कि कोयले के उत्पादन का नहीं बढ़ना हमें विरासत में मिला है। मैं सौ दिन में कोयले का उत्पादन नहीं बढ़ा सकता। लेकिन सचाई यह है कि उपलब्ध संसाधनों से हमने बिजली आपूर्ति में 22 फीसद की वृद्धि की है और ये सभी बिजलीघर कोयला आधारित हैं।

गोयल ने कहा कि अवैध कोयला खान आबंटन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार तेजी से कदम उठाएगी और 2019 तक कोयला उत्पादन बढ़ाकर एक अरब डालर टन तक किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 1993 से विभिन्न केंद्र सरकारों के दौरान कोयला खानों का आबंटन अवैध और मनमाने तरीके से किया गया। इससे 218 कोयला खानों और करीब दो लाख करोड़ रुपए के निवेश के भविष्य पर अनिश्चितता छा गई है। चार सितंबर तक देश के 28 बिजलीघरों में चार दिन से कम का कोयला बचा था।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया खानों से तेजी से कोयले की ढुलाई के लिए 250 रेल रैक खरीदने के लिए 5,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार बिजली क्षेत्र की कायापलट करने और सभी बिजलीघरों, उद्योगों व वाणिज्यिक इकाइयों को 24 घंटे बिजली व खेती के लिए बिजली मुहैया कराने के लिए प्रतिबद्ध है। गोयल ने कहा कि सरकार कोयला


उत्पादन बढ़ाने के हरसंभव प्रयास कर रही है। साथ ही छत्तीसगढ़, झारखंड और ओड़िशा में तीन महत्त्पूर्ण रेल लाइनों को तेजी से पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इससे 2017-18 तक छह करोड़ टन और 2021-22 तक सालाना अतिरिक्त 20 करोड़ टन कोयला आपूर्ति होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि सरकार कोयला खनन परियोजनाओं के लिए तेजी से पर्यावरण मंजूरी सुनिश्चित करेगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम उठाएगी।

कोयले की व्यवस्था को युक्तिसंगत बनाने की बात करते हुए कोयला मंत्री ने कहा 32,000 मेगावाट क्षमता के पुराने बिजलीघरों को आधुनिक रूप दिया जाएगा। कोयले की उतनी ही मात्रा से अधिकतम बिजली उत्पादन के लिए पुराने और खराब बिजलीघरों के कोयला स्रोतों को अत्याधुनिक सुपरक्रिटिकल संयंत्रों को स्वत: स्थानांतरण की छूट दी जा रही है। कोयला स्रोत के साथ कड़ियों को युक्तिसंगत बनाने (गुजरात व छत्तीसगढ़ के बीच अदला-बदली पूरी) का काम जारी है जिसका मकसद बिजलीघरों को नजदीक की खानों से जोड़ना है।

पनबिजली उत्पादन कम रहने के बारे में उन्होंने कहा कि इसका कारण कमजोर मानसून है। उन्होंने कहा कि अटकी पड़ी गैस आधारित क्षमता के समाधान के लिए कई कदम उठाए गए हैं। व्यस्त समय में मांग को पूरा करने के लिए या जरूरत के समय गैस के इस्तेमाल की योजना बनाई गई है। मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने राज्यों में बिजली ग्रिड सुरक्षा में 7,000 करोड़ रुपए निवेश किए हैं। गोयल ने कहा कि 30 करोड़ से अधिक भारतीयों के पास बिजली नहीं पहुंची है। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा व आय बढ़ाने के मौकों पर प्रभाव पड़ा है।

(भाषा)


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