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आतंकियों से ‘दबकर नहीं रहेंगे’ अमेरिका और ब्रिटेन PDF Print E-mail
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Thursday, 04 September 2014 16:46


 न्यूपोर्ट (वेल्स) अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने आज घोषणा की है कि उनके देश उन आतंकियों से ‘‘दबने वाले नहीं’’ हैं, जिन्होंने दो अमेरिकी पत्रकारों की हत्या कर दी।


      नेताओं ने द टाईम्स आॅफ लंदन के संयुक्त संपादकीय में लिखा, ‘‘हम अपने मूल्यों की रक्षा के लिए और अधिक तत्पर होंगे क्योंकि हमारे लोगों को सुरक्षित रखने के लिए वृहद स्वतंत्रता वाला विश्व बुनियादी हिस्सा है।’’   इनकी टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब ये वैश्विक नेता उच्च स्तरीय नाटो सम्मेलन के लिए वेल्स में एक गोल्फ रिजॉर्ट में एकत्र हुए हैं।

      इसके आधिकारिक एजेंडे के तहत यूक्रेन के संकट और अफगानिस्तान से नाटो के लड़ाकू अभियान की वापसी पर तो गौर किया ही जाएगा लेकिन इराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह का उदय इस सम्मेलन से इतर चर्चाओं में प्रमुख मुद्दा होगा।

      अमेरिका और ब्रिटेन उन विदेशी लड़ाकों से अपनी मातृभूमियों को पैदा होने वाले खतरे को लेकर बेहद चिंतित हैं, जो हिंसक इस्लामिक स्टेट समूह से जुड़ गए हैं।

      ओबामा और कैमरन ऐसे सुझाव देते दिखे कि नाटो को आतंकियों को रोकने में एक भूमिका निभानी चाहिए लेकिन वे इस बात को स्पष्ट तौर पर नहीं बता पाए कि वे इस गठबंधन बल से किस तरह की कार्रवाई चाहते हैं।

      कैमरन ने सोमवार को नए कानून प्रस्तावित किए थे, जो पुलिस को उन ब्रितानियों के पासपोर्ट जब्त करने का अधिकार देंगे, जिनपर आतंकी समूहों के साथ मिलकर लड़ने के लिए विदेश यात्रा करने का संदेह होगा।

      यूक्रेन के


नए राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको को भी इस चर्चा में शामिल होना था। यह चर्चा अपने युद्धरत देश के साथ पश्चिमी देशों की एकता दर्शाने के लिए थी।

      यूक्रेन और रूस पिछले कई महीनों से संघर्षरत हैं। मास्को समर्थित बल पूर्वी यूक्रेन के शहरों में अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। नाटो सम्मेलन की पूर्व संध्या पर रूस और यूक्रेन ने कहा कि वे लड़ाई को रोकने के लिए एक संधि पर काम कर रहे हैं लेकिन पश्चिमी नेताओं ने इस बात पर संशय जाहिर करते हुए कहा कि यह इस घातक संघर्ष को रोकने का कोई पहला प्रयास नहीं है।

     ऐसी उम्मीद की जा रही है कि नाटो नेता इस सप्ताह एक त्वरित प्रतिक्रिया बल के गठन पर सहमत हो जाएंगे। ये बल रूस को डराकर रखने के लिए इस गठबंधन के पूर्वी हिस्से के देशों में गठित किए जाएंगे।

     बाल्टिक देशों और इस क्षेत्र के अन्य देशों को भय है कि मास्को की अगली नजर उनकी सीमाओं पर हो सकती है।

     ओबामा और कैमरन ने लिखा, ‘‘हमें पूर्वी यूरोप में एक प्रभावी मौजूदगी रखने के लिए अपनी सेना का इस्तेमाल सुनिश्चित करना होगा। हमें रूस को यह स्पष्ट करना होगा कि हम हमेशा संयुक्त आत्मरक्षा के लिए अपने पांचवे अनुच्छेद में वर्णित प्रतिबद्धताओं को बरकरार रखेंगे।’’

     नाटो चार्टर के पांचवे अनुच्छेद में कहा गया है कि यदि किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है तो उसे पूरे गठबंधन पर हुआ हमला माना जाएगा। 

(एपी)

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