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उच्चतम न्यायालय ने मीडिया पर अंकुश लगाने का रंजीत सिन्हा का अनुरोध ठुकराया PDF Print E-mail
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Thursday, 04 September 2014 09:39


नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो की जांच के दायरे में आये व्यक्तियों के ब्यूरो के निदेशक रंजीत सिन्हा के निवास पर आने से संबंधित दस्तावेज के आधार पर मीडिया को समाचार प्रसासित और प्रकाशित करने से रोकने से आज इंकार कर दिया।

      न्यायमूर्ति एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि निदेशक के निवास के आगंतुक रजिस्टर से उठा सवाल बहुत ही ‘संवेदनशील’ है और आशा की जाती है कि मीडिया जिम्मेदारी से काम करेगा।

       न्यायालय ने आगंतुक रजिस्टर की सूची का विवरण प्रकाशित करने से मीडिया को रोकने का रंजीत सिन्हा के वकील का अनुरोध ठुकरा दिया। जांच ब्यूरो के निदेशक के वकील का तर्क था कि इससे उनके निजता के अधिकार और प्रतिष्ठा का हनन होता है।

       न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘हमारा इस पर (प्रेस) कोई नियंत्रण नहीं है।

       गैर सरकारी संगठन पब्लिक इंटरेस्ट लिटीगेशन के वकील प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया है कि 2जी स्पेक्ट्रम आबंटन प्रकरण तथा दूसरे मामलों के अनेक अभियुक्त और आरोपी कंपनियों के अधिकारी सिन्हा के आवास पर नियमित रूप से आते थे।

        उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि सिन्हा कुछ आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं और इसलिए उन्हें पद से हटाने का अनुरोध किया है।

       न्यायालय ने कहा कि अदालत के विचाराधीन मामलों में लोगों को उसका फैसला होने तक इंतजार करना चाहिए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सीलबंद लिफाफे में उसके समक्ष पेश किये गये दस्तावेजों का विवरण उनके यहां से लीक नहीं हुआ है।

       न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘यदि कभी कोई सीमा लांघ जाये तो हम उसे रोक नहीं सकते।’’

        सिन्हा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने इन दस्तावेज की सत्यता और स्रोत पर सवाल उठाया और कहा कि निदेशक के खिलाफ लगाये गये सारे आरोप गलत हैं और ऐसे बयान ‘पूरी तरह झूठे’ हैं।

     इस मामले की आज सुबह सुनवाई शुरू होते ही न्यायालय ने कहा कि वह इन विवादास्पद दस्तावेजों का संज्ञान उस समय तक नहीं ले सकता जब कि इन्हें रिकार्ड में पेश नहीं किया


जाये। इसके साथ ही न्यायालय ने प्रशांत भूषण को हलफनामे के साथ ये सामग्री संलग्न करके दाखिल करने का निर्देश दिया। भूषण ने सीलबंद लिफाफे में आगंतुक रजिस्टर का विवरण पेश किया था।

      न्यायाधीशों ने कहा, ‘‘हमने इन दस्तावेज का अवलोकन किया है। हम इन्हें रिकार्ड में पेश किये जाने तक इनका संज्ञान नहीं ले सकते हैं।’’

       न्यायालय ने इस मामले में यथाशीघ्र सुनवाई पर सहमति व्यक्त करते हुये इसके लिये आठ सितंबर को काम के सामान्य समय से आधा घंटे पहले  सुबह दस बजे बैठने का निश्चय किया।

       निदेशक ने इन दस्तावेज के लीक होने पर भी सवाल उठाया और कहा कि शीर्ष अदालत में सीलबंद लिफाफे में पेश करने के न्यायालय के आदेश के बावजूद ये लीक कैसे हुये।

       विकास सिंह ने न्यायालय से अनुरोध किया कि इन दस्तावेज को प्राप्त करने के स्रोत के बारे में भूषण से पूछना चाहिए।

       न्यायालय ने कहा कि फिलहाल कोई निर्देश देने की आवश्यकता नहीं है और यदि भूषण अपने हलफनामे में स्रोत का खुलासा नहीं करेंगे तो सोमवार को सुनवाई के समय पूछा जायेगा।  

       केन्द्रीय जांच ब्यूरो के निदेशक इस समय विवादों के केन्द्र में है क्योंकि एक गैरसरकारी संगठन ने शीर्ष अदालत में कहा है कि उनके निवास का आगंतुक रजिस्टर ‘बहुत परेशान’ करने वाली तस्वीर पेश करता है और ‘विस्फोटक सामग्री’ 2जी स्पेक्ट्रम आबंटन मामले में न्याय के प्रशासन में बाधक बन रही है।

       यह गैर सरकारी संगठन जनहित याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं में शामिल है जिस पर शीर्ष अदालत ने 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द कर दिये थे। इसने समाचारपत्रों की खबरों का हवाला दिया है जिसमें दावा किया गया है कि पिछले 15 महीने में 2जी स्पेक्ट्रम मामले में एक कंपनी के प्रमुख अधिकारियों ने सीबीआई निदेशक के घर पर उनसे मुलाकात की।

(भाषा)


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