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अहिंसा का डीएनए हमारे समाज में रचा बसा है: नरेंद्र मोदी PDF Print E-mail
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Tuesday, 02 September 2014 11:57


तोक्यो। परमाणु अप्रसार संधि पर भारत के हस्ताक्षर न करने की वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में व्याप्त चिंता को दूर करने की कोशिश करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि शांति और अहिंसा के लिए देश की प्रतिबद्धता ‘‘भारतीय समाज के डीएनए’’ में रची बसी है जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि या प्रक्रियाओं से बहुत उच्च्पर है।


    मोदी ने यहां सैक्रेड हार्ट यूनिवर्सिटी में एक छात्र के प्रश्न के जवाब में कहा, ‘‘भारत भगवान बुद्ध की धरती है। बुद्ध शांति के लिए जिये और हमेशा शांति का पैगाम दिया तथा यह संदेश भारत में गहराई तक व्याप्त है।’’

    संवाद के दौरान उनसे पूछा गया था कि परमाणु अप्रसार संधि पर अपना रूख बदले बिना भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास कैसे हासिल करेगा। परमाणु हथियार रखने के बावजूद भारत इस संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर चुका है ।

    जापान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां परमाणु बम गिराया गया था। फिलहाल जापान की यात्रा पर यहां आए मोदी ने इस अवसर का उपयोग करते हुए तोक्यो के साथ असैन्य परमाणु करार करने के प्रयासों के बीच इस मुद्दे पर अपना यह संदेश दिया।

    भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया है क्योंकि वह इसे खामीयुक्त मानता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अहिंसा के लिए भारत की पूर्ण प्रतिबद्धता है और यह ‘‘भारतीय समाज के डीएनए में रची बसी है तथा यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय संधि से बहुत ऊपर है।’’

    उनका संदर्भ भारत के, परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से इनकार की ओर था।

  मोदी ने संधियों से ऊपर उठने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ‘‘अंतरराष्ट्रीय मामलों में, कुछ प्रक्रियाएं होती हैं। लेकिन समाज की प्रतिबद्धता सबसे ऊपर है।’’ 

    अपनी बात पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि महात्मा गांधी के नेतृत्व में पूरे समाज के साथ अहिंसा के लिए प्रतिबद्ध रहते हुए भारत ने इस तरह स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया कि पूरी दुनिया आश्चर्यचकित रह गई।

    उन्होंने कहा कि हजारों साल से भारत की आस्था सूत्र वाक्य ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ (पूरी दुनिया एक परिवार है) में रही है। ‘‘जब हम पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं तो हम ऐसा कुछ करने की कैसे सोच सकते हैं जिससे किसी को नुकसान हो।’’

    भारत ने हाल ही में आईएईए के साथ हस्ताक्षरित ‘‘सुरक्षा करार पर अतिरिक्त प्रोटोकॉल’’ (एडीशनल प्रोटोकॉल ऑन सैफेगार्ड्स एग्रीमेंट) की अभिपुष्टि की है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री से पूछा गया था कि क्या भारत परमाणु निगरानी एजेंसी के निरीक्षकों को भारत के असैन्य परमाणु संयंत्रों की आसानी से निगरानी की अनुमति देगा।

    संवाद सत्र के दौरान, एक अन्य छात्र ने मोदी से पूछा कि चीन के ‘‘विस्तारवादी’’ प्रयासों के बावजूद एशिया में शांति कैसे रह सकती है।

    इस


पर मोदी ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि आप चीन से परेशान हैं।’’ हालांकि छात्रों को संबोधित कर रहे मोदी की राय थी कि छात्र पत्रकारों की तरह सवाल पूछ रहे थे।

   चीन के संदर्भ में पूछे गए सवाल का सीधा जवाब सावधानीपूर्वक टालते हुए मोदी ने कहा, ‘‘भारत एक लोकतांत्रिक देश है। इसी तरह, जापान भी एक लोकतांत्रिक देश है। अगर भारत और जापान मिल कर शांति और सकारात्मक बातों के बारे में सोचें तो हम दुनिया को लोकतंत्र की ताकत का अहसास करा सकते हैं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘हमें दूसरों के बजाय अपना ध्यान प्रगति और विकास पर केंद्रित करना चाहिए। अगर हम अपनी स्थिति पर ध्यान देंगे तो हमारी स्थिति अच्छी होगी।’’

    मोदी ने एक काल्पनिक कहानी सुनाई, ‘‘कल्पना कीजिये, कमरे में पूरी तरह अंधेरा है। इस अंधेरे को दूर करने के लिए एक व्यक्ति झाÞड़ू लेकर कमरे में जाता है लेकिन वह गिर जाएगा। दूसरा व्यक्ति तलवार लेकर अंधेरा दूर करने अंदर जाता है। वह भी गिर जाएगा। एक अन्य व्यक्ति कंबल ले कर अंधेरा दूर करने के लिए अंदर जाता है किंतु वह भी गिर जाएगा। तब एक चतुर आदमी छोटा सा दीपक लेकर अंदर जाता है और फिर-फिर अंधेरा दूर हो जाता है । शांति, समृद्धि और लोकतंत्र का दीपक कभी भी अंधेरे से नहीं डरेगा।’’

    मोदी ने छात्रों को जलवायु पर लिखी ‘‘कन्वीनिएन्ट एक्शन’’ किताब पढ़ने का सुझाव दिया ।

    इससे पहले उन्होंने लड़कियों की एक गोष्ठी में भारत में महिलाओं की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें विभिन्न रूपों में देवी की तरह पूजा जाता है।

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां ईश्वर देवी के रूप में हैं।’’ एक मंत्रिमंडल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा का संबंध देवी सरस्वती से, वित्त का संबंधी देवी लक्ष्मी से, गृह संबंधी मामलों का सरोकार देवी महाकाली से और खाद्य सुरक्षा का संबंध देवी अन्नपूर्णा से है।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत में स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण प्राप्त है।

    मोदी ने लड़कियों की शिक्षा के प्रति अपने निजी रूझान के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि जब वह प्रधानमंत्री बने तो गुजरात छोड़ते समय उन्होंने, अपने 14 साल के मुख्यमंत्रित्व काल में मिले सभी उपहारों की नीलामी की। इस नीलामी से 78 करोड़ रूपये एकत्र हुए और वह राशि लड़कियों की शिक्षा के लिए उपयोग की खातिर सरकारी कोष में जमा कर दी गई।

    विश्वविद्यालय में मोदी ने उन्हें देख कर रोमांचित हुए भारतीयों के एक समूह के साथ ‘सेल्फी’ के लिए पोज़ भी दिया।

(भाषा)




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