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भारत का पाक व चीन के प्रति सख्त हो सकता है रुख PDF Print E-mail
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Tuesday, 02 September 2014 09:58


मेलबर्न। भारत की नई सरकार की विदेश नीति में आर्थिक विषयों का वर्चस्व होने की संभावना के बीच वह पाकिस्तान के प्रति सख्त नीति अपना सकती है और चीन के खिलाफ रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सकती है। यहां एक थिंक टैंक ने यह दावा किया है। मेलबर्न आधारित थिंक टैंक ने आस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट की ‘इंडियन फारेन पॉलिसी अंडर (प्रधानमंत्री) मोदी’ पर एक शोध पत्र में कहा है कि विदेश नीति के बारे में उनके सोच विचार में अर्थव्यवस्था केंद्र में है और इसलिए वह इस विचारधारा के व्यावहारिक सिद्धांत से निर्देशित होंगे। यह अध्ययन भारत और आस्ट्रेलिया के बीच संबंध के विभिन्न पहलुआें पर केंद्रित विषय का हिस्सा है। 


इसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि भारत की विदेश नीति बदल रही है और यह संघीय (स्वरूप की) हो रही है और मोदी विदेश नीति के विषयों में प्रांतों के योगदान की उभर रही नयी प्रवृति का औचित्य सही ठहराने को इच्छुक हैं। 

पत्र में इस बात का जिक्र किया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी भारत के सबसे तेजी से प्रगति करने वाले राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर अतीत में उठाए गए अपने कदम पर आगे बढ़ेंगे और ‘भारत की पूर्व की ओर देखो नीति’ को वरीयता देंगे। इसमें कहा गया है कि हालांकि पाकिस्तान और चीन के प्रति वह सख्त रुख अख्तियार कर सकते हैं। 

पत्र में कहा गया है कि मोदी जो उत्तर भारत से नहीं हैं, पाकिस्तान से अलग तरह का बर्ताव कर सकते हैं। वह उस वक्त तक रियायत देने को इच्छुक नहीं होंगे जब तक कि सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद खत्म नहीं हो


जाता।

अध्ययन में कहा गया है कि अपने पूर्वाधिकारी के उलट मोदी भारत की सैन्य क्षमता को मजबूत करेंगे ताकि यह पाकिस्तानी दुस्साहस के खिलाफ विश्वसनीय प्रतिरोधी बन सके। मोदी के तहत भारत-चीन सीमा पर अपर्याप्त सैन्य बुनियादी ढांचे को बेहतर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। 

इसमें कहा गया है कि मोदी के तहत भारत की विदेश नीति में सुरक्षा और रक्षा का विषय अहम होगा। विदेश नीति में सैन्य मजबूती को, खासतौर पर चीन और पाकिस्तान के प्रति, वाजिब महत्त्व दिया जाएगा। इसमें कहा गया है, मोदी अक्सर कहा करते हैं कि उनकी सरकार भारत के सैन्य बलों के आधुनिकीकरण को प्राथमिकता देगी और इसका मतलब है कि अधिक हथियारों की जरूरत पड़ेगी, जिसे भारत के अंदर से विदेशों से लिया जाएगा। 

इसमें आगे तर्क दिया गया है कि मोदी परमाणु ऊर्जा के घोर हिमायती हैं और अधिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाना चाहेंगे। इसके लिए परमाणु ईंधन की जरूरत होगी और इस तरह आस्ट्रेलिया जैसे देश अहम भूमिका निभाएंगे। 

अध्ययन में कहा गया है कि मोदी निर्यात बढ़ाएंगे, देश के मजबूत सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र पर भविष्य का निर्माण करेंगे, विदेशी निवेश जुटाएंगे और भारत के उद्यमियों के लिए व्यापार के अन्य अवसर तलाशेंगे। 

इसमें यह सुझाव भी दिया गया है कि विदेशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों को भारत के राष्ट्रीय हितों और मामलों का वैश्विक पटल पर स्पष्ट रूप से बयां करने वाला एक विशाल स्रोत मानने वाले मोदी इस स्रोत का उपयोग ‘ब्रांड इंडिया’ को मजबूत करने में करेंगे।

(भाषा)

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