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इमरान व कादरी पर आतंकवाद का मामला दर्ज PDF Print E-mail
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Tuesday, 02 September 2014 09:19


इस्लामाबाद।। क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान और मौलाना ताहिर उल कादरी पर पाकिस्तान की संसद पर हमले की कोशिश करने के मामले में आतंकवाद रोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को हटाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकार ने सख्त कार्रवाई का मन बना लिया है। पुलिस ने सरकार की ओर से पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीआइ) के अध्यक्ष खान और पाकिस्तान अवामी तहरीक (पीएटी) के अध्यक्ष कादरी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। खान और कादरी के समर्थकों ने शनिवार रात को पुलिस बैरिकेड को तोड़कर प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के आवास तक पहुंचने का प्रयास किया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद इन दोनों को कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। पिछले साल हुए आम चुनावों में कथित धांधली को लेकर शरीफ के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारी संसद परिसर के लॉन तक पहुंच गए थे। हालांकि उन्हें इमारत के मुख्य प्रवेश द्वार पर रोक लिया गया जहां सैनिक तैनात थे।


खबरों के मुताबिक अवामी मुसलिम लीग (एएमएल) के अध्यक्ष शेख राशिद और पीएटी व पीटीआइ के अन्य वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ भी आतंकवाद से जुड़े कानूनों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। पाकिस्तान टीवी (पीटीवी) की इमारत पर हमले को लेकर पीएटी व पीटीआई के नेताओं के खिलाफ एक और मामला तैयार किया जा रहा है जो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, लूटपाट करने से संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया जाएगा।

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि आंदोलनकारी पाकिस्तान को विनाश की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये आंदोलनकारी पाकिस्तान को शेष दुनिया से काटना चाहते हैं और उनका लोकतंत्र से कोई लेना देना नहीं है। वे अराजकता फैला रहे हैं। रेडियो पाकिस्तान की खबर के अनुसार आसिफ ने कहा कि धैर्य रखने और संयम बरतने की हद होती है और सरका

पाकिस्तान में गहराते राजनीतिक संकट पर चर्चा करने के लिए सेना प्रमुख ने सोमवार को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की। वहीं, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को भारी सुरक्षा वाले सचिवालय और सरकारी टेलीविजन के कार्यालय पर धावा बोल दिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच ताजा झड़पें सोमवार सुबह तब शुरू हुईं जब सेना की ओर से सभी पक्षों से गतिरोध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की अपील के चंद घंटे बाद ही प्रदर्शनकारी यहां सचिवालय का द्वार तोड़कर जबरन अंदर घुस गए।र को संयम बरतने की नीति बदलनी होगी।   

दो हफ्ते से चले आ रहे राजनीतिक संकट के हिंसक होने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने भी सोमवार को गतिरोध खत्म कराने में मदद की पेशकश की। विरोध मार्चों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पीटीआइ के वकील को यह सूचित करने के लिए एक घंटे की समयसीमा दी कि वे उसका हस्तक्षेप स्वीकार करेंगे या नहीं।

रविवार रात हुई


बारिश के चलते थोड़ी देर की शांति के बाद लाठी-डंडों से लैस प्रदर्शनकारी इमारत में नहीं घुसने के सेना के परामर्श का उल्लंघन करते हुए गेट तोड़कर सचिवालय के अंदर घुस गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए रबड़ की गोलियां चलाईं और आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन असफल रही। प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय कर्मियों के वाहनों को नष्ट कर दिया।

इसके बाद, सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान टेलीविजन (पीटीवी) के दफ्तर पर धावा बोल दिया और कुछ देर के लिए उसका प्रसारण ठप कर दिया। इसके बाद सेना ने इमारत को अपने नियंत्रण में लिया और प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाल दिया। प्रदर्शनकारी पीटीवी नेटवर्क के दफ्तर में घुस गए। उन्होंने कैमरे तोड़ दिए और नियंत्रण कक्ष में पहुंच गए। इमारत में घुसने वाले प्रदर्शनकारियों की संख्या 800 से ज्यादा थी। इसके बाद फौज टीवी स्टेशन के मुख्यालय पहुंची और प्रदर्शनकारियों से तत्काल इमारत खाली करने को कहा। इसके बाद सेना ने पीटीवी मुख्यालय को अपने नियंत्रण में ले लिया और प्रदर्शनकारियों को बाहर निकाल दिया।

ताजा झड़पें रविवार रात सेना के कोर कमांडरों की आपातकालीन बैठक के बाद हुई हैं। ‘लोकतंत्र का समर्थन करने’ की बात फिर से दोहराते हुए सेना ने देश के हालात की समीक्षा की। 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद आधे से अधिक समय तक देश पर जनरलों ने राज किया है। सेना ने कहा है कि बिना समय गवांए और हिंसा का सहारा लिए बिना स्थिति का समाधान निकाला जाना चाहिए।

खान और कादरी के समर्थक शनिवार रात से प्रधानमंत्री आवास पर पहुंचने के लिए पुलिस से जूझ रहे हैं। झड़पें तब शुरू हुईं जब संसद के बाहर डेरा डाले खान और कादरी दोनों ने अपने समर्थकों से धरना स्थल से प्रधानमंत्री आवास के लॉन की तरफ कूच करने को कहा।

इस बीच, खान ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के शासन के खात्मे का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि हमने सेना से जारी राजनीतिक संकट में मध्यस्थ बनने को नहीं कहा। पीटीवी मुख्यालय पर हमले की निंदा करते हुए पीटीआइ प्रमुख ने कहा कि पीटीवी मुख्यालय में घुसने वाले हमारे कार्यकर्ता नहीं हैं। मैंने किसी भी कार्यकर्ता से प्रधानमंत्री आवास की तरफ बढ़ने या किसी भी इमारत में प्रवेश करने को नहीं कहा है।

कादरी ने अपने समर्थकों से कहा कि वे फौज की ओर से तय की गई सीमा को कभी पार नहीं करें। कादरी ने कहा- कड़ाई से सेना के आदेशों का पालन करिए। पिछले 48 घंटे के दौरान उच्च सुरक्षा वाले रेड जोन में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुए खूनी संघर्ष में तीन लोग मारे गए हैं और 550 से अधिक घायल हुए हैं। 

(भाषा)


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