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मोदी ने कुछ देशों की ‘विस्तारवादी’ प्रवृत्ति की निन्दा की PDF Print E-mail
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Monday, 01 September 2014 14:27

 

तोक्यो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरों के सागर पर ‘‘अतिक्रमण’’ करने की कुछ देशों की ‘‘विस्तारवादी’’ प्रवृत्ति की आज निंदा की । उनकी यह टिप्पणी परोक्ष रूप से चीन के खिलाफ मानी जा रही है जिसका जापान के साथ समु्रदी विवाद है ।


    मोदी ने यहां भारत और जापान के व्यापार जगत की हस्तियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘समूचा विश्व स्वीकार करता है कि 21वीं सदी एशिया की होगी । लेकिन मेरा एक सवाल है । 21वीं सदी कैसी होनी चाहिए ? हमें इसका उत्तर देना है । यह इस पर निर्भर करेगा कि हमारे (भारत और जापान के बीच) संबंध कितने गहरे हैं ।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘हमें निर्णय करना होगा कि हम ‘विकासवाद’ चाहते हैं या ‘विस्तारवाद’, जिसका परिणाम विघटन की ओर जाता है । जो बुद्ध के रास्ते को मानते हैं और ‘विकासवाद’ पर भरोसा रखते हैं, वे विकास करते हैं । लेकिन हम देखते हैं, कि जो 18वीं सदी के विचार रखते हैं, वे अतिक्रमण में शामिल हैं और (दूसरों के) सागरों में प्रवेश करते हैं ।’’

मोदी ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी इस टिप्पणी को चीन पर निशाने के रूप में देखा जा सकता है जिसका अपने पड़ोसियों: भारत, जापान और वियतनाम सहित कुछ अन्य के साथ क्षेत्रीय विवाद है ।

    भारत और चीन के बीच 4,000 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा है । चीन अरूणाचल प्रदेश की लगभग 90 हजार वर्ग किलोमीटर और जम्मू कश्मीर


की 38 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर दावा करता है ।

    इसके अतिरिक्त, पूर्वी चीन सागर में द्वीप विवाद और समु्रद के नीचे गैस भंडार के दोहन को लेकर जापान तथा चीन के बीच संबंध तनावूपर्ण हैं ।

    चीन दक्षिण चीन सागर के 90 प्रतिशत हिस्से पर भी अपना हक जताता है जहां तेल और गैस के भंडार बताए जाते हैं । ब्रुनेई, मलेशिया, वियतनाम, फिलीपीन और ताइवान भी दक्षिण चीन सागर के हिस्सों पर अपना दावा जताते हैं ।

    मोदी ने ‘‘विस्तारवाद की जगह विकासवाद’’ को आगे ले जाने के लिए भारत और जापान के बीच करीबी एवं घनिष्ठ संबंधों की आवश्यकता पर जोर दिया ।

    उन्होंने रेखांकित किया कि भारत और जापान को मानवता की आवश्यकताओें को पूरा करने के लिए शांति और प्रगति को बढ़ावा देना चाहिए ।

    प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत और जापान के पास एक बड़ी जिम्मेदारी है । यह केवल सरकारों और नेताओं की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि करोबारी जगत की भी जिम्मेदारी है कि वह यह देखे कि विश्व कहां जा रहा है ।’’

    शांति एवं प्रगति के लिए कारोबारी जगत को एक ‘‘बड़े प्रेरणा बल’’ के रूप में देखते हुए मोदी ने कहा कि भारत मानवता के भले के लिए भूमिका निभाना चाहता है ।

(भाषा)


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