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नरेंद्र मोदी ने किया स्कूल का दौरा, भारत में जापानी भाषा पढ़ाने के लिए मांगी मदद PDF Print E-mail
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Monday, 01 September 2014 09:10


तोक्यो। भारत में शिक्षा के मानकों का उन्नयन करने के इच्छुक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान की अकादमिक प्रणाली को समझने के लिए आज यहां एक ‘छात्र’ के तौर पर 136 साल पुराने स्कूल गए ताकि ऐसी ही प्रणाली अपने देश में भी लागू की जा सके।

    प्रधानमंत्री ने भारत में जापानी भाषा पढ़ाने के लिए यहां के शिक्षकों को आमंत्रित किया और 21 वीं सदी को सही मायने में एशिया की सदी बनाने के उद्देश्य से एशियाई देशों में भाषाओं तथा सामाजिक मूल्यों के लिए सहयोग को आगे बढ़ाने की अपनी वकालत के बीच आॅनलाइन पाठ्यक्रमों का प्रस्ताव भी दिया।

    मोदी ने तेइमेई एलीमेन्ट्री स्कूल में कहा, ‘‘यहां आने का मेरा इरादा यह समझना है कि आधुनिकीकरण, नैतिक शिक्षा और अनुशासन, जापान की शिक्षा प्रणाली में किस प्रकार एकाकार हुए है। मैं 136 साल पुराने स्कूल में सर्वाधिक उम्रदराज छात्र के तौर पर आया हूं।’’

    प्रधानमंत्री को उप शिक्षा मंत्री माएकावा केहाई ने जापान की शिक्षा प्रणाली, खास कर सरकार द्वारा संचालित प्रणाली और कार्यों के बारे में विस्तार से बताया।

    मोदी ने कुछ सवाल पूछे जैसे पाठ्यक्रम कैसे तैयार किया जाता है, क्या प्रोन्नति के लिए परीक्षा एकमात्र मानदंड है, क्या छात्रों को दंड दिया जाता है और उन्हें नैतिक शिक्षा कैसे दी जाती है?

 


 मोदी ने कहा ‘‘अब मैं ज्ञानवान महसूस कर रहा हूं।’’

    उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि 21 वीं सदी एशिया की होगी। उन्होंने कहा कि इसे वास्तविकता में बदलने के लिए एशियाई देशों को भाषाओं और सामाजिक मूल्यों की दिशा में सहयोग बढ़ाना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने कहा ‘‘इससे पूरी मानवता की सेवा होनी चाहिए।’’

    मोदी ने कहा कि इस संदर्भ में ‘सेंट्रल बोर्ड आॅफ सेकंड्री एजुकेशन’ :सीबीएसई: ने भारत में जापानी भाषा के पाठ्यक्रमों की शुरूआत की है लेकिन देश में दक्ष जापानी शिक्षकों की कमी है। उन्होंने जापानी शिक्षकों को भारत में पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया। 

    उन्होंने कहा ‘‘यहां तक कि सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी स्वागत है।’’

    मोदी ने प्रस्ताव दिया कि जापान द्वारा ऑनलाइन और आॅडियो वीडियो पाठ्यक्रम शुरू किये जा सकते हैं और परीक्षाएं यहां आयोजित की जा सकती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय छात्रों में से कई इसे पसंद करेंगे।

    उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के संदर्भ में भी ऐसी ही व्यवस्था की जा सकती है।

(भाषा) 


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