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न्यायमूर्ति मुद्गल समिति ने IPL सट्टेबाजी मामले में न्यायालय को सौंपी जांच रिपोर्ट PDF Print E-mail
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Friday, 29 August 2014 16:00


नई दिल्ली। आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पाट फिक्सिंग के मामले में आईसीसी के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और 12 प्रमुख खिलाड़ियों के खिलाफ जांच करने वाली न्यायमूर्ति मुकुल मुद्गल की अध्यक्षता वाली समिति ने आज अपनी रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को सौंप दी।


       न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस तथ्य का उल्लेख किया तो इसके बाद न्यायालय ने रिपोर्ट रिकार्ड में लेते हुए इस मामले की सुनवाई एक सितंबर के लिये निर्धारित कर दी।

      शीर्ष अदालत ने मई में इस प्रकरण की जांच अपनी ही समिति ने कराने की भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड की पेशकश ठुकराते हुये यह मामला न्यायमूर्ति मुद्गल समिति को सौंप दिया था।

       न्यायमूर्ति मुद्गल समिति ने इससे पहले भी इसी मामले से जुड़े कुछ पहलुओं की जांच करके अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में न्यायालय को सौंपी थी जिसमे श्रीनिवासन और 12 क्रिकेट खिलाड़ियां के नाम का उल्लेख था।

       न्यायालय ने उस वक्त कहा था, ‘‘हमारी यह सुविचारित राय है कि सीलबंद


लिफाफे में सौंपी गयी रिपोर्ट में शामिल एन श्रीनिवासन सहित 13 व्यक्तियों के खिलाफ न्यायमूर्ति मुद्गल समिति को ही आगे जांच करनी चाहिए क्योंकि यदि इन आरोपों की जांच के लिये नयी जांच समिति को सौंपी गयी तो इसमे आरोपों के जनता में लीक होने की संभावना बनी रहेगी और इस तरह की लीक से 13 व्यक्तियों की प्रतिष्ठा को अपूर्णीय क्षति पहुंचेगी।’’

       इस जांच दल में न्यायमूर्ति मुद्गल के अलावा अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एल नागेश्वर राव और वकील नीलय दत्ता इसके सदस्य थे। 

       न्यायालय ने जांच समिति से कहा था कि यह काम पूरा करके अगस्त के अंत तक सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश की जाये।

        भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी बीबी मिश्रा की अध्यक्षता में जांचकर्ताओं के एक समूह ने इस काम में जांच समिति की सहायता की थी। 

(भाषा)


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