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महंगा भी पड़ सकता है ‘एकला चलो’ का राजनीतिक जुआ PDF Print E-mail
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Friday, 29 August 2014 09:21



विवेक सक्सेना

नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव के ऐन मौके पर भाजपा व हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) का तीन साल पुराना गठबंधन टूट गया है। भाजपा का अकेले चुनाव में उतरना उसे महंगा साबित हो सकता है। हजकां के दगाबाजी के आरोपों पर भाजपा का कहना है कि वह लोकसभा चुनाव के समय से ही कांग्रेस की ‘बी टीम’ के रूप में काम रही है और आम चुनावों की तरह अब विधानसभा चुनावों में भी प्रदेश की जनता उसे अच्छा सबक सिखाएगी। मालूम हो कि तीन साल पहले जब यह गठबंधन हुआ था तब दोनों दलों ने राज्य की 90 में से आधी-आधी सीटों पर चुनाव लड़ने व कुलदीप बिश्नोई को मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करने का फैसला किया था। बदले में हजकां ने राज्य की 10 में से आठ लोकसभा सीटें उसकोे लिए छोड़ देने का वादा किया था। इस चुनाव में हजकां ने तो अपना वादा निभाया पर केंद्र में बहुमत मिलते ही भाजपा मुकर गई। उसकी दलील थी कि जब कुलदीप बिश्नोई अपनी लोकसभा की सीट तक न बचा पाए हों तो उन्हें विधानसभा में आधी सीटें कैसे दी जा सकती हैं। बिश्नोई कांग्रेस छोड़ कर आने वाले विनोद शर्मा को करनाल से टिकट देना चाहते थे पर भाजपा ने इस पर आपत्ति जताते हुए उनके हजकां में शामिल होने तक पर रोक लगा दी थी। कुछ दिन पहले अमित शाह ने उन्हें लंबा इंतजार करवाने के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं की। उनसे स्पष्ट कह दिया गया था कि वे भाजपा में अपने दल का विलय कर लें। चुनाव के नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री पद के बारे में फैसला विधायक करेंगे। बिश्नोई इससे काफी अपमानित महसूस कर रहे थे।

बिश्नोई के भाजपा से नाता तोड़ने के एलान के कुछ ही देर बाद भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि यह हजकां ही है जिसने भाजपा से गठबंधन करने के बावजूद लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की ‘बी टीम’ बन कर काम किया। लोकसभा चुनाव के बाद राजग से नाता तोड़ने वाली हजकां पहली पार्टी है।

शाहनवाज ने कहा कि कांग्रेस के खिलाफ जनता के आक्रोश की जमीनी हकीकत को हजकां समझ नहीं पाई और उसकी बी टीम के रूप में काम करती रही है। इसीलिए नरेंद्र मोदी की इतनी बड़ी हवा होने के बावजूद हजकां के दोनों उम्मीदवारों को वहां की जनता ने नकार दिया। उन्होंने कहा कि ‘मोदी लहर’ में भाजपा से मिलकर चुनाव लड़ने के बावजूद दोनों सीटें हार जाने पर भी बिश्नोई जमीनी हकीकत को नहीं समझ रहे हैं और मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं। लोकसभा चुनाव में जनता उनकी पार्टी को आईना दिखा चुकी है और अब


विधानसभा चुनाव में जनता उनका बचा खुचा गुमान भी तोड़ देगी।

उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने दम पर चुनाव लड़ेगी और अपने ही दम पर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाएगी। उन्होंने दावा किया कि हरियाणा की जनता भाजपा की सरकार और भाजपा का मुख्यमंत्री देखना चाहती है। भाजपा और हजकां के बीच दरार लोकसभा चुनावों से नजर आ रही थी। हजकां ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा और दोनों पर हार गई जबकि भाजपा ने सात सीटों पर जीत दर्ज की।

शाहनवाज ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव के दौरान ही हमने हजकां से कह दिया था कि अगर वह कांग्रेस की बी टीम बन कर काम करना जारी रखेगी तो रिश्ते चलना मुश्किल होगा। उन्होंने दावा किया कि बिश्नोई हमारा संदेश समझ गए और इसीलिए हमें छोड़ गए। हमने कभी किसी सहयोगी को दगा नहीं दिया है। लेकिन यह नहीं चल सकता कि कोई हमारे साथ गठबंधन करे और किसी और की बी टीम बन कर काम करे।

बिश्नोई ने अब कांग्रेस के पूर्व नेता विनोद शर्मा की जन चेतना पार्टी (जेसीपी) के साथ गठबंधन का फैसला किया है। हरियाणा में अक्तूबर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। हरियाणा के चुनाव में जाट बनाम गैर जाट की लड़ाई चलती आई है। जहां इनेलो का मुख्य वोट बैंक जाट रहे हैं, वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेता के रूप में पेश करने का कांग्रेस को लाभ मिला व जाटों के एक बड़े वर्ग का झुकाव इस पार्टी के प्रति हुआ। राज्य में लगभग 28 फीसद जाट व बाकी अन्य जातियां हैं। भाजपा कोे गैर जाट खासकर बनियों व ब्राह्मणों आदि के वोट मिलते आए हैं। सबसे अच्छे समय में भी वह 17 से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाई है। वह भी तब जबकि उसका ओमप्रकाश चौटाला की पार्टी के साथ चुनाव में गठबंधन था।

माना जा रहा है कि हजकां व विनोद शर्मा की पार्टी का भी वही वोट बैंक है जो भाजपा का है। ऐसे में आम चुनाव के महज तीन महीने के अंदर होने वाले उपचुनावों में जब भाजपा हार रही हो, तो उसका अपने बलबूते पर राज्य की सभी 90 सीटों पर लड़ना बहुत बड़ा राजनीतिक जुआ माना जा रहा है। गोपाल कांडा ने भी अपने बलबूते पर राज्य में चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। विधानसभा चुनाव में चंद हजार वोटों का अंतर भी हार जीत का समीकरण बदल सकता है। ऐसे में बहुकोणीय मुकाबले में किसको लाभ मिलता है, यह तो चुनाव के नतीजे ही बताएंगे।


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