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अतार्किक सुरक्षा PDF Print E-mail
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Thursday, 28 August 2014 11:13

जनसत्ता 28 अगस्त, 2014 : साल भर पहले उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के एक बड़े हिस्से में फैले सांप्रदायिक दंगे में पांच दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए थे। पीड़ितों में से बहुत से लोग आज भी खौफ के साए में जी रहे हैं। इस दौरान केंद्र या राज्य सरकार के स्तर पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के मोर्चे पर क्या किया गया, यह छिपा नहीं है। लेकिन विचित्र है कि पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में कुछ ठोस करने के बजाय सरकार को दंगों के आरोपियों की सुरक्षा की फिक्र शायद ज्यादा सता रही है। गौरतलब है कि भाजपा विधायक और मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी संगीत सोम को केंद्र सरकार ने जेड श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला किया है। वाई श्रेणी की सुरक्षा उन्हें पहले ही मिली हुई है। संगीत सोम पर आरोप है कि दंगों के दौरान उन्होंने भड़काऊ भाषण दिया था और दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने वाली सीडी बंटवाई थी। इसी वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा था और फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं। स्वाभाविक ही केंद्र सरकार के इस फैसले पर विवाद शुरू हो गया है। विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा है कि दंगों के आरोपी को जेड श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराना पीड़ितों के साथ क्रूर मजाक है। पर भाजपा की दलील है कि खुफिया एजेंसियों की जानकारी और संगीत सोम पर खतरे के मद्देनजर गृह मंत्रालय ने यह कदम उठाया है। लेकिन उन्हें जिन हालात में और जिस पैमाने की सुरक्षा देने का फैसला किया गया, क्या उसके बाद इस तरह के आरोपों में घिरे दूसरे लोगों का हौसला नहीं बढ़ेगा और क्या वे भी अपने ऊपर जोखिम बता कर इसी सुविधा की मांग नहीं करने लगेंगे? मुजफ्फरनगर दंगों के दूसरे आरोपी और भाजपा विधायक सुरेश राणा ने खुद को मिली वाई श्रेणी की सुरक्षा को नाकाफी बताते हुए इसे बढ़ाए जाने की मांग करके इसकी शुरुआत कर भी दी है। 

विडंबना है कि देश के किसी इलाके में इतने बड़े पैमाने पर दंगा फैल जाता है और जानमाल की भारी क्षति होती है,


लेकिन सरकारों को उनके बारे में समय पर कोई खुफिया सूचना नहीं मिल पाती और साधारण नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसे जरूरी नहीं लगता। वहीं जब उसे किसी को सबसे उच्च श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करानी होती है तो उसके लिए कई दलीलें पेश कर दी जाती हैं। हालांकि इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। कुछ समय पहले सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति फर्जी मुठभेड़ मामले में आरोपी रहे अमित शाह को भाजपा का अध्यक्ष बनाए जाने के पहले जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी। यूपीए सरकार के दौरान कांग्रेस पार्टी से जुड़े कई नेताओं को भी गैरजरूरी तरीके से यह सुरक्षा देने पर सवाल उठे थे। दरअसल, अति विशिष्ट पैमाने का सुरक्षा घेरा जितना संबंधित व्यक्ति की जरूरत को लक्षित होता है, उससे ज्यादा उसे राजनीतिक रुतबे को बढ़ाने के तौर पर देखा जाता है। एक आकलन के मुताबिक सर्वोच्च सुरक्षा कवच प्राप्त कम से कम तीस फीसद हस्तियां ऐसी हैं, जिन्हें इस स्तर की सुरक्षा की जरूरत नहीं है। वहीं विशिष्ट कहे जाने वाले लगभग पचास फीसद ऐसे लोग हैं, जिनके लिए हल्की सुरक्षा-व्यवस्था पर्याप्त रहेगी। मगर विचित्र है कि भाजपा सरकार ने इन तथ्यों से वाकिफ होते हुए भी संगीत सोम जैसे व्यक्ति को जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान कर यही साबित किया कि उसे अपने लोगों की सुरक्षा की चिंता ज्यादा है। 


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