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डीएलएफ को 630 करोड़ रुपए जमा कराने का निर्देश PDF Print E-mail
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Thursday, 28 August 2014 09:44



जनसत्ता ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ को निर्देश दिया कि उसकी अपील लंबित होने के दौरान जुर्माने की 630 करोड़ रुपए की राशि जमा कराई जाए। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने कथित रूप से अनुचित व्यापारिक आचरण अपनाने के कारण डीएलएफ पर यह जुर्माना लगाया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रतिस्पर्धा अपीली पंचाट के 19 मई के आदेश के खिलाफ डीएलएफ की अपील लंबित होने के दौरान उसे तीन महीने के भीतर रजिस्ट्री में यह रकम जमा करानी होगी। पंचाट ने डीएलएफ पर 630 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने के प्रतिस्पर्धा आयोग के फैसले को बरकरार रखा था।

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और एनवी रमण के खंड पीठ ने अपने अंतरिम आदेश में कहा- हम अपीलकर्ता (डीएलएफ) को निर्देश देते हैं कि 630 करोड़ रुपए की रकम इस अदालत में जमा कराई जाई। अदालत ने कहा कि जहां तक इस रकम पर ब्याज का सवाल है तो इसका निर्धारण नौ नवंबर, 2011 के प्रतिस्पर्धा आयोग के आदेश के अनुरूप ही


होगा। यह नौ फीसद निर्धारित किया गया था। अदालत ने डीएलएफ को नए सिरे से यह आश्वासन दाखिल करने का निर्देश दिया कि अपील खारिज होने की स्थिति में वह अदालत के निर्देशानुसार सारी रकम का भुगतान करेगा।

डीएलएफ ने यह रकम जमा कराने के लिए छह महीने का वक्त देने का अनुरोध किया था, लेकिन अदालत ने उसे सिर्फ तीन महीने का समय दिया। यही नहीं अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि उसे तीन हफ्ते के भीतर 50 करोड़ रुपए जमा कराने हैं और रजिस्ट्री किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक में इसका निवेश करने के लिए स्वतंत्र होगी। अदालत ने इसके साथ ही डीएलएफ की अपील विचारार्थ स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। 

इस मामले में हरियाणा सरकार और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को रेजीडेंट्स एसोसिएशन के साथ प्रतिवादी बनाया गया है। इसी एसोसिएशन की याचिका में डीएलएफ पर जुर्माना लगाया गया है।  

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