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साल में कभी भी लिए जा सकते हैं रसोई गैस के 12 सस्ते सिलेंडर PDF Print E-mail
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Thursday, 28 August 2014 09:18


नई दिल्ली। एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरकार ने बुधवार को कहा कि ग्राहक 12 सस्ते सिलेंडर का अपना कोटा साल भर में कभी भी ले सकते हैं। इसके लिए जरूरी नहीं है कि उन्हें हर महीने एक ही सस्ता सिलेंडर मिलेगा। सरकार ने इस साल फरवरी में 14.2 किलो सस्ते गैस सिलेंडर का कोटा सालाना नौ से बढ़ाकर 12 कर दिया था। लेकिन इसके साथ ही यह भी शर्त लगा दी गई थी कि उपभोक्ता को एक महीने में केवल एक ही सस्ता सिलेंडर दिया जाएगा। दूरसंचार और कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यहां कहा,‘मंत्रिमंडल आज इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि इस प्रणाली से लोगों को परेशानी हो रही है। कई बार लोगों को महीने में एक भी सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती और कई बार त्योहार के मौसम में एक से अधिक सिलेंडर की जरूरत हो जाती है। ऐसा माना जा रहा था कि यदि किसी ग्राहक ने किसी एक महीने में सब्सिडीशुदा सस्ता सिलेंडर नहीं लिया तो साल के शेष महीनों में वह सिलेंडर ग्राहक को नहीं मिलेंगे।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय की संवाददाताओं को जानकारी देते हुए प्रसाद ने कहा कि इस शर्त को हटा लिया गया है। प्रसाद ने कहा कि मंत्रिमंडल के आज के फैसले के बाद एलपीजी सिलेंडर के ग्राहक वर्ष के दौरान किसी भी समय सब्सिडीशुदा 12 सिलेंडर का अपना कोटा ले सकेंगे। दिल्ली में सब्सिडीशुदा सिलेंडर 414 रुपए में दिया जाता है। साल के दौरान तय कोटे से अधिक जरूरत पड़ने पर ग्राहक को यही सिलेंडर 920 रुपए में दिया जाएगा।

आधिकारिक बयान के मुताबिक वर्तमान में एलपीजी ग्राहक एक साल में सब्सिडी वाले 12 सिलेंडर प्राप्त कर सकता है। लेकिन इसके साथ ही यह शर्त भी


थी कि एक महीने में ऐसा एक ही सिलेंडर दिया जाएगा।’ बयान में कहा गया है,‘सरकार ने अब इस प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया है। ग्राहक को सालभर में सब्सिडी वाले 12 सिलेंडर मिलेंगे लेकिन एक महीने में एक सिलेंडर लेने की शर्त अब नहीं होगी।’ सरकार के इस फैसले से उन ग्राहकों को राहत मिलेगी जिनकी महीने में एक से ज्यादा सिलेंडर की खपत होती है।

मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद विधि मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के तीन उपक्रमों  ओएनजीसी, कोल इंडिया और एनएचपीसी की हिस्सेदारी बिक्री पर फैसला टाल दिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली राजधानी में नहीं थे, जिस वजह से यह फैसला टाला गया। प्रसाद ने कहा,‘सीसीईए ने विनिवेश प्रस्तावों पर विचार नहीं किया क्योंकि संबंधित मंत्री उपस्थित नहीं थे।’ 

अनुमानों के मुताबिक इन तीन सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश से सरकार को 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक मिल सकते हैं। यह राशि चालू वित्त वर्ष के विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने के लिए काफी होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सीसीईए के समक्ष ओएनजीसी की पांच फीसद हिस्सेदारी बिक्री का प्रस्ताव था। मौजूदा बाजार मूल्य पर ओएनजीसी के विनिवेश से सरकार को 18 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे। इसके अलावा कोल इंडिया की 10 फीसद हिस्सेदारी बिक्री से 22 हजार करोड़ रुपए और एनएचपीसी की 11.36 फीसद हिस्सेदारी बिक्री से 26 सौ करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त होगी। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से 43,425 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। 

(भाषा)


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